पूर्वी रेलवे के आसनसोल मंडल में ₹432 करोड़ की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग परियोजना को मंजूरी

भारतीय रेलवे ने पूर्वी रेलवे के आसनसोल मंडल के हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन) और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (एचयूएन) रूट पर 432 करोड़ रुपए की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत 27 स्टेशनों और केबिनों तथा एक इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नल (आईबीएस) लोकेशन सहित कुल 28 रिले-आधारित इंटरलॉकिंग प्रणालियों को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से बदला जाएगा।

27 स्टेशनों पर लगेगा आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम

परियोजना के तहत 27 स्टेशनों एवं केबिनों तथा एक आईबीएस लोकेशन पर पुराने रिले-आधारित इंटरलॉकिंग सिस्टम को आधुनिक कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से बदला जाएगा। इससे ट्रेन संचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

आधुनिक रेल संचालन को मिलेगा बढ़ावा

यह परियोजना भारतीय रेलवे के उस व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत हाई डेंसिटी और अत्यधिक व्यस्त रेल मार्गों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग स्थापित की जा रही है। इन मार्गों पर पहले से कवच, ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) और सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल (सीटीसी) जैसी आधुनिक सिग्नलिंग प्रणालियां लागू की जा रही हैं।

सुरक्षा और क्षमता दोनों होंगी बेहतर

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली पुराने रिले-आधारित सिस्टम की तुलना में अधिक विश्वसनीय है। इससे खराबी का तेजी से पता लगाया जा सकेगा, रखरखाव आसान होगा और परिचालन दक्षता बढ़ेगी। परियोजना से रेलवे सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक पर लाइन क्षमता और ट्रेन संचालन की दक्षता भी बढ़ेगी।

रेलवे आधुनिकीकरण को मिलेगी नई गति

भारतीय रेलवे का मानना है कि यह परियोजना आधुनिक सिग्नलिंग अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल रेल संचालन सुनिश्चित करने के साथ भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप नेटवर्क को तैयार किया जा सकेगा। (इनपुट: पीआईबी)