सहारा के 41.56 लाख जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपए वापस, रिफंड पोर्टल फिर बहाल

सहारा की सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं के दावों के त्वरित निपटान के लिए सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल को फिर से बहाल कर दिया गया है। सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 41,56,711 जमाकर्ताओं को उनके आधार से जुड़े बैंक खातों के जरिए सीधे 9,267 करोड़ रुपए की राशि वापस की जा चुकी है। पोर्टल के माध्यम से करीब 20 लाख आवेदन अभी भी प्रसंस्करण के लिए लंबित हैं और पोर्टल के बहाल होने के बाद इन दावों के सत्यापन और रिफंड की प्रक्रिया फिर शुरू हो गई है।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप जारी है रिफंड प्रक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय सहकारी समितियों के सदस्यों के हितों की रक्षा और सहकारी क्षेत्र में जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (सीआरसीएस) ने सर्वोच्च न्यायालय के 29 मार्च 2023 के डब्ल्यू.पी. संख्या 191/2022 के आदेश के अनुरूप वास्तविक और पात्र जमाकर्ताओं को उनकी देय राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू की है।

41.56 लाख जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपए लौटाए

मंत्रालय के अनुसार, अब तक कुल 9,267 करोड़ रुपए की राशि 41,56,711 जमाकर्ताओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे जमा की जा चुकी है। सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल पर करीब 20 लाख आवेदन अभी प्रसंस्करण के लिए शेष हैं। पोर्टल के दोबारा सक्रिय होने के बाद इन लंबित आवेदनों के सत्यापन और रिफंड की प्रक्रिया भी फिर से शुरू हो गई है।

नवंबर 2025 में प्रभावित हुआ था कामकाज

सहारा सहकारी समितियों का कामकाज नवंबर 2025 में प्रभावित हुआ था। सहारा समितियों से असंबद्ध कुछ मामलों के कारण उनके परिसरों को सील किए जाने से परिचालन संबंधी दिक्कतें पैदा हुई थीं। इसके अलावा हार्डवेयर और वार्षिक रखरखाव अनुबंध (एएमसी) से जुड़ी बकाया राशि, जरूरी आईटी अवसंरचना और लाइसेंसों के नवीनीकरण तथा मानव संसाधन और प्रशासनिक मामलों से जुड़ी बाधाओं का भी सामना करना पड़ा।

रिफंड सत्यापन की प्रणालियां हुई थीं बाधित

इन प्रशासनिक, वित्तीय, परिचालन और तकनीकी बाधाओं के चलते रिफंड दावों के सत्यापन और प्रसंस्करण के लिए जरूरी प्रणालियों का संचालन प्रभावित हुआ था। इससे जमाकर्ताओं के दावों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया में भी बाधा आई।

मंत्रालय ने बाधाएं दूर करने के लिए किया समन्वय

सहकारिता मंत्रालय और सीआरसीएस ने रिफंड व्यवस्था को प्रभावित करने वाली प्रशासनिक, वित्तीय, परिचालन और तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय किया। उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों और संबंधित प्राधिकरणों के साथ लगातार संस्थागत पहल के जरिए जरूरी प्रणालियों, आईटी अवसंरचना और प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी बाधाओं का समाधान किया गया। इसके बाद पोर्टल और उससे जुड़ी सत्यापन प्रणालियों को फिर से बहाल किया जा सका।

चार सहारा समितियों के जमाकर्ताओं के दावों का प्रसंस्करण शुरू

पोर्टल और सत्यापन व्यवस्था बहाल होने के बाद सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं की वैध देय राशि के दावों का प्रसंस्करण फिर शुरू हो गया है। इनमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, लखनऊ; सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, भोपाल; हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, कोलकाता और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, हैदराबाद शामिल हैं।

डिजिटल और कागज-रहित व्यवस्था से हो रहा रिफंड

रिफंड प्रक्रिया सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल के जरिए संचालित की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, पूरी व्यवस्था डिजिटल, पारदर्शी, कागज-रहित और सत्यापन-आधारित है। सरकार ने 18 जुलाई 2023 को यह समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया था। इसके जरिए जमाकर्ता बिना किसी भौतिक कागजी कार्रवाई के अपना रिफंड आवेदन जमा कर सकते हैं और प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होता है।

आधार ई-केवाईसी से दावों का सत्यापन

दावों का प्रसंस्करण आधार ई-केवाईसी और संबंधित सहकारी समितियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। इसमें जमाकर्ता, सदस्यता और खाते से संबंधित विवरणों का मिलान किया जाता है। जमा प्रमाण-पत्र या रसीदों और अन्य निर्धारित दस्तावेजों की भी जांच की जाती है।

सफल सत्यापन के बाद खाते में सीधे जमा होती है राशि

दावों का सत्यापन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर स्थापित निगरानी व्यवस्था के तहत अनुमोदित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार किया जाता है। सत्यापन सफल होने के बाद पात्र रिफंड राशि सीधे जमाकर्ता के आधार से जुड़े बैंक खाते में जमा की जाती है।

आईटी और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया गया

सहकारिता मंत्रालय और सीआरसीएस ने जरूरी आईटी अवसंरचना को मजबूत करने, आवश्यक प्रणालियों और लाइसेंसों का नवीनीकरण करने तथा परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए समन्वित कदम उठाए हैं। इसके साथ ही मानव संसाधन और अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़ी समस्याओं का भी समाधान किया गया है, ताकि लंबित दावों के सत्यापन और प्रसंस्करण में तेजी लाई जा सके।

जमाकर्ताओं को केवल आधिकारिक पोर्टल इस्तेमाल करने की सलाह

मंत्रालय ने जमाकर्ताओं को नए दावे प्रस्तुत करने के लिए केवल आधिकारिक सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। नए दावों के लिए mocrefund.crcs.gov.in और प्रस्तुत दावों में त्रुटियों के सुधार के लिए सूचना मिलने पर mocresubmit.crcs.gov.in पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है। जमाकर्ताओं से निर्धारित प्रक्रिया और दस्तावेज संबंधी आवश्यकताओं का पालन करने को कहा गया है।

अनधिकृत माध्यमों से बचने की अपील

मंत्रालय ने कहा है कि दावे प्रस्तुत या पुनः प्रस्तुत करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने से समयबद्ध सत्यापन में मदद मिलेगी। साथ ही इससे जमाकर्ताओं को अनधिकृत माध्यमों और भ्रामक दावों से सुरक्षित रखने में भी सहायता मिलेगी। (इनपुट: पीआईबी)