कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अधीन प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के तहत राष्ट्रीय कौशल अर्हता कार्यढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप 170 पाठ्यक्रमों में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करता है। कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
तीन वर्ष में पाठ्यचर्याओं के पुनरीक्षण की व्यवस्था
डीजीटी के अनुसार आईटीआई के माध्यम से संचालित सभी पाठ्यक्रम एनएसक्यूएफ के अनुरूप हैं और राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) से अनुमोदित हैं। तकनीकी प्रगति, व्यावसायिक मानकों में बदलाव और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यचर्याओं का पुनरीक्षण आवश्यकता के आधार पर अथवा एनसीवीईटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष में किया जाता है। वर्तमान में सीटीएस के 40 पाठ्यचर्याओं का पुनरीक्षण पूरा किया जा चुका है।
उद्योग की जरूरतों के अनुसार लगातार बदल रहा पाठ्यक्रम
पाठ्यचर्या समीक्षा और पुनरीक्षण को सतत एवं आवश्यकता आधारित प्रक्रिया के रूप में अपनाया गया है। इसमें उभरती प्रौद्योगिकियों, बदलते व्यावसायिक मानकों, उद्योग की मांग, रोजगार के रुझानों, शिक्षुता की जरूरतों, प्रशिक्षण परिणामों और कार्यान्वयन के दौरान प्राप्त फीडबैक का आकलन किया जाता है। इसके आधार पर पाठ्यक्रमों में आवश्यक बदलाव किए जाते हैं।
एआई से हरित ऊर्जा तक नई तकनीकों को जगह
पाठ्यक्रमों में उद्योग 4.0 के अनुप्रयोगों, कृत्रिम मेधा (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), स्वचालन, हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल कौशल, उद्यमशीलता, कार्यस्थल सुरक्षा, पर्यावरणीय टिकाऊपन और परिणाम आधारित शिक्षण जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षुओं को बदलती तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
पुनरीक्षण में विभिन्न हितधारकों से व्यापक परामर्श
पाठ्यचर्या पुनरीक्षण के दौरान राज्य और संघ राज्य क्षेत्र सरकारों, उद्योग प्रतिनिधियों, क्षेत्र कौशल परिषदों (एसएससी), राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई), विषय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नियोजकों और कार्यान्वयन एजेंसियों समेत विभिन्न हितधारकों से परामर्श किया जाता है। आवश्यकता के अनुसार अन्य मंत्रालयों और विभागों को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
महिलाओं के लिए सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश का अवसर
महिला अभ्यर्थी निर्धारित प्रवेश अर्हताओं के आधार पर सीटीएस के तहत सभी एनएसक्यूएफ-अनुरूप पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकती हैं। इनमें 32 नव युगीन और भावी कौशल पाठ्यक्रम भी शामिल हैं। 170 पाठ्यक्रमों में ड्रेस मेकिंग, सिलाई प्रौद्योगिकी, सरफेस ऑर्नामेंटेशन टेक्निक्स (कढ़ाई), कंप्यूटर एडेड एम्ब्रॉयडरी एंड डिजाइनिंग, फैशन डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी, कॉस्मेटोलॉजी और स्पा थेरेपी सात ऐसे पाठ्यक्रम हैं, जो महिलाओं के लिए विशेष रूप से संचालित किए जाते हैं।
महिला अभ्यर्थियों के लिए 30% सीटों का प्रावधान
भारत सरकार ने सभी राजकीय और निजी आईटीआई में सभी पाठ्यक्रमों के तहत महिला अभ्यर्थियों के लिए 30% सीटों का आरक्षण मंजूर किया है। इन सीटों को संबंधित राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र सरकारों की सामान्य आरक्षण नीति के अनुसार भरा जा सकता है।
एआई, रोबोटिक्स और ईवी समेत 32 आधुनिक कौशल पाठ्यक्रम
डीजीटी ने भविष्य की उद्योग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम मेधा, मेकाट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, औद्योगिक रोबोटिक्स, उन्नत विनिर्माण, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, इलेक्ट्रॉनिकी, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में 32 नव युगीन एवं आधुनिक कौशल पाठ्यक्रम तैयार किए हैं। इसके अलावा उद्योग की बदलती मांग और भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं के अनुरूप कौशलोन्नयन एवं पुनर्कौशलीकरण के लिए नए अल्पकालिक पाठ्यक्रम भी विकसित किए जा रहे हैं।
5जी से न्यूक्लियर पावर तक नए ट्रेड
सीटीएस के तहत आधुनिक कौशल पाठ्यक्रमों में 5जी नेटवर्क टेक्नीशियन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3डी प्रिंटिंग) टेक्नीशियन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, साइबर सिक्योरिटी असिस्टेंट, डेटा एनोटेशन असिस्टेंट, ड्रोन पायलट (जूनियर), ड्रोन टेक्नीशियन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन टेक्नीशियन और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स एवं डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं।
इसके अलावा इंटरनेट ऑफ थिंग्स टेक्नीशियन (स्मार्ट एग्रीकल्चर, स्मार्ट सिटी और स्मार्ट हेल्थकेयर), मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर टेक्नीशियन, सोलर टेक्नीशियन (इलेक्ट्रिकल), टेक्नीशियन मेकाट्रॉनिक्स, विंड प्लांट टेक्नीशियन, न्यूक्लियर पावर प्लांट टेक्नीशियन, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग असिस्टेंट और स्मार्टफोन टेक्नीशियन कम ऐप टेस्टर जैसे ट्रेड भी शामिल किए गए हैं।
श्रम बाजार की मांग के आधार पर तैयार हो रहे नए पाठ्यक्रम
नए पाठ्यक्रम शुरू करने और मौजूदा पाठ्यक्रमों के पुनरीक्षण के लिए श्रम बाजार की मांग का आकलन कौशल अंतराल अध्ययनों तथा उद्योगों, सेक्टर कौशल परिषदों, जिला कौशल समितियों, नियोजकों, उद्योग संघों, राज्य सरकारों, प्रशिक्षण संस्थानों और विषय विशेषज्ञों के साथ लगातार परामर्श के जरिए किया जाता है। पाठ्यक्रम तैयार करते समय उद्योग की जरूरतों, तकनीकी प्रगति, व्यावसायिक मानकों, रोजगार के रुझानों, शिक्षुता के अवसरों और उभरती कौशल जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है।
रोजगार-क्षमता बढ़ाने पर फोकस
सरकार की यह परामर्श आधारित व्यवस्था यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि आईटीआई पाठ्यक्रम उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बने रहें। इसके जरिए प्रशिक्षुओं की रोजगार-क्षमता बढ़ाने और उन्हें अर्थव्यवस्था की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। (इनपुट: पीआईबी)


