प्रतिक्रिया | Saturday, April 13, 2024

08/08/23 | 4:18 pm

2047 तक भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है MSME सेक्टर 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर पिछले पांच दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था के एक अत्यधिक जीवंत एवं गतिशील क्षेत्र के रूप में उभरा है। यह सेक्टर  कृषि के पश्चात तुलनात्मक रूप से कम पूंजीगत लागत पर उद्यमिता को प्रोत्साहित तो  करता ही है, साथ ही बड़े रोजगार के अवसर सृजित करके देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सहायक इकाइयों के रूप में बड़े उद्योगों के अनुपूरक हैं और यह क्षेत्र देश के समग्र औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। एमएसएमई (MSME) अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में अपना प्रसार कर रहे हैं। यह घरेलू और वैश्विक बाजारों की मांग को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पादों का उत्पादन और सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। 

भारत की अर्थव्यवस्था में MSME की भागीदारी  

भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग एक तिहाई हिस्सेदारी MSME सेक्टर की है। इस सेक्टर से जुड़े करोड़ों लोग देश के ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। इसलिए MSME सेक्टर देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।सरकार निर्यात बढ़ाने में एमएसएमई की मदद के लिए कदम उठा रही है। विदेश में भारतीय मिशन को इस पर काम करने को कहा गया है। भारतीय निर्यात में एमएसएमई के योगदान को बढ़ाने और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए, एमएसएमई मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (आईसी) योजना लागू कर रहा है। इस योजना के तहत पात्र केंद्र/राज्य सरकार के संगठनों और उद्योग संघों को यात्रा की सुविधा के लिए प्रतिपूर्ति के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। प्रौद्योगिकी उन्नयन, आधुनिकीकरण, संयुक्त उद्यम आदि के उद्देश्य से विदेश में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों/मेलों/क्रेता-विक्रेता बैठकों में और भारत में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन/सेमिनार/कार्यशालाओं के आयोजन के लिए एमएसएमई की भागीदारी होती है। इसके अलावा, आईसी योजना के नए घटक के तहत अर्थात् जून 2022 में लॉन्च किए गए पहली बार निर्यातकों की क्षमता निर्माण (सीबीएफटीई), ईपीसी, निर्यात बीमा प्रीमियम और परीक्षण और पंजीकरण-सह-सदस्यता प्रमाणन (आरसीएमसी) पर होने वाली लागत के लिए नए सूक्ष्म और लघु उद्यम (एमएसई) निर्यातकों को प्रतिपूर्ति प्रदान की जाती है। एमएसएमई (MSME) मंत्रालय ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) को अपेक्षित सलाह और सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से देशभर में 52 निर्यात सुविधा केंद्र (ईएफसी) स्थापित किए हैं।

MSME सेक्टर के मजबूत होने से समाज होगा मजबूत 

एमएसएमई  भारत की आजादी के 'अमृत काल' के संकल्पों को साकार करने का एक प्रमुख माध्यम है। यह 900 करोड़ की संशोधित क्रेडिट गारंटी MSME योजना को पहले से भी अधिक बल प्रदान करेगी। 11 करोड़ से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, एमएसएमई रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है। बिना गारंटी के ऋण प्राप्त करने में कठिनाई समाज के कमजोर वर्गों के लिए उद्यमिता की राह पर चलने में एक बड़ी बाधा थी। 2014 के बाद सरकार ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के माध्यम से उद्यमिता का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बिना गारंटी के बैंक ऋण की इस योजना ने देश में महिला उद्यमियों, दलित, पिछड़े, आदिवासी उद्यमियों का एक बड़ा वर्ग तैयार किया है। इस योजना के तहत अब तक करीब 19 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया जा चुका है। कर्ज लेने वालों में लगभग 7 करोड़ ऐसे उद्यमी हैं, जिन्होंने पहली बार कोई उद्यम शुरू किया है, जो नए उद्यमी बन गए हैं। उद्यम पोर्टल पर भी, पंजीकृत लोगों में से 18 प्रतिशत से अधिक महिला उद्यमी हैं।

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आखरी अपडेट: 13th Apr 2024