प्रदूषित नदी क्षेत्रों के सुधार कार्य हेतु 218 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाएं स्वीकृत : केंद्र

नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदूषित नदी क्षेत्रों के सुधार कार्य हेतु 35,698 करोड़ रुपये लागत की कुल 218 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं के तहत 6,610 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) क्षमता के सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 3,977 एमएलडी क्षमता वाले 138 एसटीपी पूर्ण कर चालू कर दिए गए हैं।

यह सूचना जल शक्ति राज्यमंत्री राज भूषण चौधरी द्वारा राज्यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रदूषित नदी खंडों (पीआरएस) पर वर्ष 2018 और वर्ष 2025 की रिपोर्टों के अनुसार गंगा नदी के मुख्य प्रवाह की जल गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025 (जनवरी से अगस्त) के दौरान गंगा नदी के जल गुणवत्ता ऑकडों (मीडियन वैल्यू) के आधार पर यह पाया गया है कि गंगा नदी के सभी स्थानों पर पीएच और घुलीय ऑक्सीजन (डीओ) स्नान मानदंडों के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं। तथापि, उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद से कानपुर में पुराना राजापुर, रायबरेली में डलमऊ और मिर्जापुर अनुप्रवाह से तारीघाट, गाजीपुर के स्थानों/हिस्सों को छोड़कर उत्तराखंड, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में गंगा नदी के पूरे प्रवाह में जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) मानकों के अनुरूप पाया गया है।

वर्ष 2024-25 के दौरान गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे 50 स्थानों पर और यमुना नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे 26 स्थानों पर की गई जैव निगरानी के अनुसार, जैविक जल गुणवत्ता (बीडब्ल्यूक्यू) मुख्य रूप से ‘अच्छी’ से ‘मध्यम’ रही। विभिन्न प्रकार की बेंथिक मैक्रो-इनवर्टेब्रेट प्रजातियों की उपस्थिति नदियों में जलीय जीवन को बनाए रखने की पारिस्थितिक क्षमता को इंगित करता है।

राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) की केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत तेलंगाना में मूसी नदी के प्रदूषण निवारण के लिए हैदराबाद में कुल 593 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता वाले 4 (चार) सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त, तेलंगाना में गोदावरी नदी के प्रदूषण निवारण के लिए भद्राचलम, मंचेरियल और रामागुंडम में कुल 28.46 एमएलडी क्षमता वाले 5 (पांच) अन्य एसटीपी स्थापित किए गए हैं।

वहीं, नमामि गंगे की तरह एनआरसीपी के अंतर्गत गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा, कावेरी, महानदी और पेरियार नामक छह नदी बेसिनों के लिए “स्थिति आकलन एवं प्रबंधन योजना (सीएएमपी)” परियोजना हेतु बारह विभिन्न संस्थानों और संगठनों को शामिल किया गया है।

नमामि गंगे कार्यक्रम और एनआरसीपी दोनों के तहत, गंगा और देश की अन्य नदियों को साफ करने और संरक्षित करने के प्रयासों में जनता के बीच जिम्मेदारी और सहभागिता की भावना को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए गए हैं, जिनमें शैक्षिक सामग्री, सामुदायिक संपर्क, स्कूल कार्यक्रम, जनसंचार अभियान, सफाई अभियान और ऑनलाइन सहभागिता शामिल हैं।

एनएमसीजी शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी समूहों, सहयोगी संगठनों और जिला गंगा समितियों आदि के सहयोग से लगातार स्वच्छता अभियान और जागरूकता अभियान चला रहा है ताकि घाटों और नदी तटों के पास रहने वाले समुदायों को जल प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को अपनाने के स्थायी प्रयासों और तरीकों के बारे में जागरूक और शिक्षित किया जा सके।

यही नहीं, सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता को सोशल मीडिया के माध्यम से भी बढ़ावा दिया जा रहा है क्योंकि यह जनता, विशेष रूप से युवाओं से जुड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वच्छता पखवाड़ा गंगा उत्सव, गंगा रन, गंगा राफ्टिंग अभियान, ट्रेकिंग, सामाजिक संदेश के साथ घाट पे हाट और कई अन्य ऐसी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। (इनपुट-पीआईबी)