भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने बताया है कि देश के तलछटी बेसिन क्षेत्र(sedimentary basin) में जितनी तेल और गैस की खोज हो रही है, उसका 76 प्रतिशत हिस्सा वर्ष 2014 के बाद सक्रिय खोज के दायरे में आया है। उन्होंने यह जानकारी शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित CII वार्षिक बिजनेस समिट में दी। मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने भारत के तलछटी बेसिन में तेल और गैस की खोज के लिए उपयोग में लाई जा रही जमीन को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है, और यह जल्द ही 15 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत की तेल और गैस खोज वाली जमीन को 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाना है।
हरदीप पुरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में जहां भू-राजनीतिक अस्थिरता, संघर्ष और जलवायु प्रतिबद्धताएं अहम भूमिका निभा रही हैं, भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा अब एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 242.4 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जिस पर देश ने करीब 137 अरब डॉलर खर्च किए। साथ ही, भारत अब 40 देशों से तेल आयात कर रहा है, जबकि पहले यह संख्या केवल 27 थी।
उन्होंने कहा कि भारत ने ऊर्जा की उपलब्धता, वहन योग्य मूल्य और टिकाऊपन (availability, affordability and sustainability) की तिकड़ी से सफलतापूर्वक निपटते हुए ऐसा दौर देखा है जब वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें आसमान छू रही थीं, लेकिन भारत में ये कीमतें न केवल घटीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय नीतियों के चलते स्थिर बनी रहीं। पुरी ने यह भी बताया कि भारत अब ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नवाचार के माध्यम से हरित ऊर्जा संक्रमण (green energy transition) को गति दी जा रही है। इस संदर्भ में उन्होंने एथनॉल मिलाने की पहल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में एथनॉल की मिलावट को 2013-14 में 1.53 प्रतिशत से बढ़ाकर अप्रैल 2025 तक लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है।-(IANS)


