तमिलनाडु में पुनर्विकास के लिए 77 अमृत स्टेशन चुने गए; 18 स्टेशनों पर काम पूरा

तमिलनाडु में 77 अमृत स्टेशनों को पूरी तरह से पुनर्विकास के लिए चुना गया है, जिनमें से 18 स्टेशनों पर काम पहले ही पूरा हो चुका है। वर्ष 2014 से, लगभग 1,350 किमी ट्रैक बनाए गए हैं। वहीं राज्य में भारतीय रेलवे ने 97 प्रतिशत विद्युतीकरण भी हासिल किया है, इस दौरान 2,386 किमी रेल लाइनों का विद्युतीकरण किया जा चुका है।

रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर साझा की पोस्टों में कहा कि 2014 से तमिलनाडु का बजट आवंटन 8.5 गुना से ज़्यादा बढ़ गया है, जो 2026-27 में ₹7,611 करोड़ तक पहुंच गया है।

वर्तमान रेलवे परियोजनाओं के लिए, ज़रूरी ज़मीन का सिर्फ़ 24 प्रतिशत ही सौंपा गया है, यानी 4,326 हेक्टेयर में से 1,052 हेक्टेयर। ज़मीन अधिग्रहण के लिए तमिलनाडु सरकार को पहले ही ₹1,465 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। राज्य सरकार के पास ज़मीन अधिग्रहण का काम लंबित होने के कारण अनेक महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं में देरी हो रही है।

दरअसल, अनेक परियोजनाओं के लिए ज़मीन अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अरुप्पुकोट्टई (144 किमी) के रास्ते मदुरै-तूतीकोरिन नई लाइन के लिए 91 प्रतिशत ज़मीन अधिग्रहण बाकी है, जबकि टिंडीवनम-गिंजी-तिरुवन्नामलाई नई लाइन (71.33 किमी) के लिए 86 प्रतिशत ज़मीन अधिग्रहण बाकी है। रामेश्वरम-धनुषकोडी नई लाइन परियोजना की आधारशिला माननीय प्रधानमंत्री ने 2019 में रखी थी, हालांकि, ज़मीन अधिग्रहण अभी शुरू होना बाकी है।

इन चुनौतियों के बावजूद, केन्‍द्र सरकार ने तमिलनाडु के आर्थिक और औद्योगिक विकास की सहायता के लिए कई नई लाइनों के निर्माण, दोहरीकरण, और तीसरी और चौथी लाइनों को मंज़ूरी दी है, और आगे क्षमता विस्तार के लिए डीपीआर भी तैयार किए गए हैं।

“मेड इन इंडिया” आधुनिक ट्रेनें राज्य के लोगों के लिए बेहतर और किफायती यात्रा सुनिश्चित कर रही हैं, जिसमें वंदे भारत एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाओं की नौ-नौ जोड़ी ट्रेनें अभी चल रही हैं।