नकली खाद, कीटनाशकों और भ्रामक लेबल के तहत बेचे जा रहे अवैध बायो-स्टिमुलेंट्स को लेकर चिंता जताते हुए सरकार ने घोषणा की है कि नकली खाद और कीटनाशकों के खिलाफ एक विधेयक अगली संसद सत्र में पेश किया जाएगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार इस तरह की गड़बड़ियों के खिलाफ समग्र कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा, “आगामी संसद सत्र में एक नया विधेयक लाया जाएगा। इसके तहत सख्त कानून बनाए जाएंगे और बेईमान व्यापारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
कृषि मंत्री यहां पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में किसान ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘चौधरी चरण सिंह किसान सम्मान समारोह’ को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने हाल ही में पारित ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’, जिसे आम तौर पर ‘जी राम जी लॉ’ कहा जा रहा है, पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस कानून का मूल उद्देश्य गरीबों के कल्याण की भावना पर आधारित है।
उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत गारंटीकृत रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष मनरेगा के तहत 88,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये और फिर 1.11 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी राशि का सार्थक उपयोग ग्रामीण विकास कार्यों के लिए नहीं होना चाहिए?
उन्होंने कहा कि केवल गड्ढे खोदने जैसे कार्यों से रोजगार गारंटी योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता और इससे कई बार भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी बनती है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नया कानून रोजगार की गारंटी के साथ-साथ गांवों में स्पष्ट बदलाव सुनिश्चित करेगा। इसके तहत प्रत्येक गांव अपनी विकास परियोजनाओं की सूची तैयार करेगा और उसी के अनुसार काम किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास साथ-साथ चलेंगे। गांवों में स्कूलों का निर्माण, नालियों, सड़कों, पुलियों और खेतों तक जाने वाली सड़कों का निर्माण भी इस योजना में शामिल होगा।
मंत्री ने कहा कि नया कानून पंचायतों को उनकी विकास और रोजगार जरूरतों के अनुसार वर्गीकृत करता है और उसी आधार पर फंड का आवंटन किया जाएगा। इसमें बुवाई, कटाई और कृषि कार्यों में लगे श्रमिकों को भी ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि किसानों और श्रमिकों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधे संवाद की जरूरत पर जोर देते हुए ‘लैब-टू-लैंड’ विजन को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि शोध सीधे खेतों तक पहुंच सके।
उन्होंने बताया कि सरकार ने निर्णय लिया है कि वैज्ञानिक साल में कम से कम एक बार खेतों का दौरा करेंगे, ताकि किसानों से सीधा संवाद और ज्ञान का आदान-प्रदान हो सके। उन्होंने शोधकर्ताओं से भी आग्रह किया कि वे अपना शोध किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप करें।


