भारत और जिम्बाब्वे के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। दोनों देशों की पहली संयुक्त रक्षा समिति (जेडीसी) की बैठक 4 जून को नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें रक्षा क्षेत्र में मौजूदा सहयोग का विस्तार करने और कई नए क्षेत्रों में साझेदारी विकसित करने पर सहमति बनी। इस बैठक को दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
मौजूदा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति
बैठक के दौरान दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और साझा वायु संपत्तियों के रखरखाव जैसे मौजूदा सहयोग क्षेत्रों को और सशक्त बनाने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही रक्षा सहयोग को अधिक व्यावहारिक और व्यापक स्वरूप देने पर भी जोर दिया गया।
नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा
बैठक में रक्षा उत्पादन, संयुक्त विनिर्माण, आतंकवाद-रोधी अभियान, सीमा प्रबंधन और शांति स्थापना अभियानों जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने क्षमता निर्माण और संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया।
दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने की सह-अध्यक्षता
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और जिम्बाब्वे की ओर से स्थायी सचिव एरॉन डेनियल टोंडे न्हेपेरा ने की। जिम्बाब्वे के स्थायी सचिव 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में तीनों सेनाओं, रक्षा उत्पादन विभाग और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
एयरो इंडिया 2025 के एमओयू को मिलेगा व्यावहारिक स्वरूप
विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक उन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम है, जिन्हें दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने एयरो इंडिया 2025 के दौरान हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (एमओयू) में निर्धारित किया था। पहली संयुक्त रक्षा समिति बैठक से इन लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में गति मिलने की उम्मीद है।
भारतीय रक्षा उद्योग में दिखाई रुचि
अपने दौरे के दौरान जिम्बाब्वे के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित डीपीएसयू भवन का भी दौरा किया। यहां उन्होंने भारतीय रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ संभावित सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की। बैठक में रक्षा उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं का आकलन किया गया। जिम्बाब्वे ने भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग में विशेष रुचि दिखाई। दोनों पक्षों ने रक्षा उपकरणों, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में मिलकर काम करने की संभावनाओं पर विचार किया।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी श्रद्धांजलि
भारत यात्रा की शुरुआत में जिम्बाब्वे के स्थायी सचिव एरॉन डेनियल टोंडे न्हेपेरा ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
अफ्रीका में भारत की रणनीतिक भागीदारी को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि पहली संयुक्त रक्षा समिति बैठक दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ अफ्रीका क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भागीदारी को भी मजबूत करेगी। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, साझा सुरक्षा हितों और दीर्घकालिक रक्षा सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। बैठक की सफलता के बाद रक्षा, प्रशिक्षण, उद्योग और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्रों में भविष्य में साझेदारी के और अधिक विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। (इनपुट: आईएएनएस)


