18/03/26 | 11:30 am | ALMM | ऊर्जा | सौर

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सोलर उद्योग में आयात निर्भरता घटाने की दिशा में नई पहल

केंद्र सरकार ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) ढांचे का विस्तार करते हुए अब इसे इंगॉट और वेफर तक लागू करने का फैसला किया है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार ALMM List-III 1 जून 2028 से लागू होगी। इसके बाद सभी सोलर परियोजनाओं में ALMM सूची में शामिल वेफर का उपयोग अनिवार्य होगा।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे भारत के सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

क्या है इस फैसले का उद्देश्य

सरकार का लक्ष्य है कि सोलर सप्लाई चेन में घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाए, आयात पर निर्भरता घटाई जाए और गुणवत्ता मानकों को मजबूत किया जाए।

अब तक ALMM केवल मॉड्यूल और सेल पर लागू था, लेकिन अब इसे एक कदम आगे बढ़ाते हुए वेफर और इंगॉट जैसे शुरुआती चरणों तक शामिल किया गया है।

प्रमुख प्रावधान

लागू होने की तारीख: 1 जून 2028

सभी परियोजनाओं में ALMM सूची के वेफर का उपयोग अनिवार्य

कम से कम 3 स्वतंत्र निर्माण इकाइयों और 15 गीगावाट क्षमता होने पर सूची जारी होगी

वेफर निर्माताओं के पास इंगॉट निर्माण क्षमता भी जरूरी होगी

मॉड्यूल सूची में केवल वही उत्पाद शामिल होंगे, जो ALMM सूची के सेल और वेफर से बने हों

क्या होगा फायदा

सरकार के अनुसार इस फैसले से:

देश में वेफर और इंगॉट निर्माण में निवेश बढ़ेगा

सोलर सप्लाई चेन अधिक मजबूत और सुरक्षित बनेगी

आयात पर निर्भरता कम होगी

सोलर उपकरणों की गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी बेहतर होगी

रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे

सोलर लक्ष्य को मिलेगा बल

यह कदम भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को भी मजबूती देगा।

ALMM का विस्तार

सरकार ने बताया कि ALMM लागू होने के बाद सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2021 के 8.2 गीगावाट से बढ़कर करीब 172 गीगावाट तक पहुंच गई है, जबकि सोलर सेल क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है।