सुरक्षित, भरोसेमंद और नागरिक-केंद्रित डिजिटल भारत की ओर एक मजबूत कदम: डेटा गोपनीयता दिवस

डेटा गोपनीयता दिवस प्रतिवर्ष 28 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डिजिटल युग में व्यक्तिगत डेटा और गोपनीयता की सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इसे डेटा संरक्षण दिवस के रूप में भी जाना जाता है। इस दिवस की शुरूआत 2006 में यूरोप परिषद द्वारा कन्वेंशन 108 पर हस्ताक्षर की स्मृति में की गई थी जो डेटा संरक्षण पर दुनिया की पहली कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है।

डेटा गोपनीयता जिम्मेदार डिजिटल शासन का मूलभूत स्तंभ है। यह व्यापक डिजिटल सार्वजनिक मंचों पर नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और संरक्षण करती है। डेटा गोपनीयता सरकारी डिजिटल सेवाओं में विश्वास को मजबूत करके जनता का भरोसा बढ़ाती है। मजबूत डेटा गोपनीयता ढांचे डिजिटल प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित, नैतिक और संरक्षित तरीके से अपनाने को बढ़ावा देकर जिम्मेदार डिजिटल उपयोग को सक्षम बनाते हैं। ये दुरुपयोग को रोककर, साइबर खतरों को कम करके और डेटा से संबंधित धोखाधड़ी की पहचान करके डेटा और साइबर जोखिमों को कम करने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा, मजबूत डेटा सुरक्षा व्यवस्था पारदर्शिता, प्रभावी निगरानी और स्पष्ट रूप से परिभाषित संस्थागत जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करके शासन और जवाबदेही को बढ़ाती है।

तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल समाज में, विश्वास, सुरक्षा और समावेश को बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा आवश्यक है। जैसे-जैसे डिजिटल सार्वजनिक प्लेटफॉर्म का दायरा और प्रभाव बढ़ता जा रहा है, डेटा गोपनीयता के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि नवाचार नागरिक-केंद्रित, नैतिक और जवाबदेह बना रहे। डेटा गोपनीयता दिवस मनाना डिजिटल अधिकारों की रक्षा में सरकारों, संस्थानों और नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी को सुदृढ़ करता है।

भारत की बढ़ती डिजिटल उपस्थिति और गोपनीयता की अनिवार्यता

देश के तीव्र डिजिटलीकरण ने नागरिकों के राज्य के साथ संवाद करने, सेवाओं तक पहुंचने और शासन में भाग लेने के तरीके को बदल दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अब जनसंख्या के व्यापक स्तर पर काम कर रहे हैं, जिससे डेटा एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन बन गया है जो सेवा वितरण, समावेशन और नवाचार का आधार है। इस बदलाव ने दक्षता और सुलभता प्रदान करने के साथ-साथ व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के महत्व को भी बढ़ा दिया है। भारत के डिजिटल विस्तार के साथ-साथ, डिजिटल प्रणालियों में गोपनीयता और सुरक्षा को समाहित करना शासन की एक प्रमुख प्राथमिकता बन गई है।

  1. देश के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विस्तार और पहुंच: देश की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) इसके डिजिटल परिवर्तन की रीढ़ बनकर उभरी है, जिससे सेवाओं की निर्बाध पहुंच और व्यापक नागरिक भागीदारी संभव हो पाई है। आधार जैसी प्रमुख पहलों ने एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान ढांचा स्थापित किया है, जबकि यूपीआई ने तत्क्षण डिजिटल भुगतान के माध्यम से रोजमर्रा के वित्तीय लेनदेन में क्रांति ला दी है। कागज रहित शासन को बढ़ावा देने वाले प्लेटफार्मों ने सार्वजनिक सेवा वितरण को सुव्यवस्थित किया है, और 6 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले मायगॉव जैसे नागरिक केंद्रित प्लेटफार्म ने सहभागी शासन को मजबूत किया है, वहीं ई-संजीवनी ने 44 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य परामर्शों की सुविधा प्रदान करके स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का व्यापक विस्तार किया है। ये सभी पहलें मिलकर भारत की डीपीआई के विस्तार, गहराई और समावेशिता को दर्शाती हैं, साथ ही व्यापक स्तर पर विश्वास बनाए रखने के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुरक्षा उपायों की जरूरत पूरी करती हैं।
  2. जनसंख्या स्तर पर कनेक्टिविटी, सामर्थ्य और डिजिटल समावेशन: देश की डिजिटल क्षमता विश्व की तीसरी सबसे बड़ी डिजिटलीकृत अर्थव्यवस्था के रूप में इसकी स्थिति से और भी मजबूत होती है, इसके 101.7 करोड़ से अधिक ब्रॉडबैंड ग्राहक (सितंबर 2025 तक) है, जिनमें से प्रत्येक ग्राहक औसतन 1,000 मिनट ऑनलाइन बिताता है। मोबाइल डेटा के लिए 0.10 डॉलर प्रति जीबी (2025) की किफायती कनेक्टिविटी ने इसके उपयोग को और भी गति दी है, जिससे भारत विश्व स्तर पर सबसे अधिक कनेक्टेड और डिजिटल रूप से समावेशी समाजों में से एक बन गया है। आज, डिजिटल प्लेटफॉर्म दैनिक जीवन के मुख्य पहलुओं को प्रभावित करते हैं, जिनमें पहचान सत्यापन, भुगतान, स्वास्थ्य सेवा वितरण, शिक्षा, शिकायत निवारण और नागरिक भागीदारी शामिल हैं। इससे डिजिटल पहुंच देश के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य की परिभाषित विशेषता बन गई है।
  3. गोपनीयता और साइबर सुरक्षा को मजबूत करना: समावेश और दक्षता को बढ़ावा देने वाला व्यापक दायरा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा की अनिवार्यता को भी बढ़ा देता है। डिजिटल संचार में तेजी से वृद्धि के कारण उत्पन्न, संसाधित और संग्रहीत व्यक्तिगत डेटा की मात्रा और संवेदनशीलता में भारी वृद्धि हुई है, जिससे डेटा के दुरुपयोग, साइबर खतरों और गोपनीयता उल्लंघन जैसे जोखिमों का खतरा बढ़ गया है। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार ने उन्नत डेटा संरक्षण और साइबर सुरक्षा ढांचों के माध्यम से संस्थागत सुरक्षा उपायों को मजबूत किया है, जिसमें साइबर सुरक्षा परियोजनाओं ( 2025-26) के लिए ₹782 करोड़ का आवंटन भी शामिल है।

28 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस का पालन करना जिम्मेदार डेटा प्रथाओं, जन जागरूकता और विश्वास-आधारित डिजिटल शासन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है। भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्मों के विस्तार और जटिलता को देखते हुए, डिज़ाइन में गोपनीयता को शामिल करना, सशक्त निगरानी और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करना डिजिटल नवाचार को सुरक्षित, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता और सुरक्षा तत्परता

जैसे-जैसे डिजिटल प्रौद्योगिकियां शासन, सेवा वितरण और आर्थिक गतिविधियों का आधार बनती जा रही हैं, डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है। देश के बढ़ते डिजिटल परितंत्र को एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचे की जरूरत है जो व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करे, डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाए और नागरिकों तथा व्यवसायों के बीच विश्वास का निर्माण करे। इसके लिए, भारत ने एक व्यापक और विकसित नियामक ढांचा स्थापित किया है जो गोपनीयता संरक्षण को नवाचार, जवाबदेही और अनुपालन में आसानी के साथ संतुलित करता है।

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 देश के साइबर क्षेत्र से संबंधित प्रमुख कानून है, जो ई-गवर्नेंस, डिजिटल वाणिज्य और साइबर सुरक्षा के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। राष्ट्रीय डेटा संरक्षण और साइबर सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप, यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता देता है, जिससे सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन और सार्वजनिक सेवाओं का डिजिटल वितरण संभव हो पाता है। यह अधिनियम साइबर विवादों के लिए न्यायनिर्णय और अपीलीय निकायों के साथ-साथ राष्ट्रीय घटना प्रतिक्रिया एजेंसी के रूप में सीईआरटी-इन सहित प्रमुख साइबर सुरक्षा और नियामक तंत्र भी स्थापित करता है। धारा 3, 3ए, 6, 46, 69ए और 70बी जैसे प्रावधान सामूहिक रूप से प्रमाणीकरण, ई-गवर्नेंस, न्यायनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सामग्री अवरोधन और साइबर घटना प्रबंधन का समर्थन करते हैं, जिससे देश के लिए एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल ढांचा तैयार होता है।

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021, भारत की विकसित होती डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए हैं। ये नियम मध्यस्थों के लिए उचित सावधानी संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करते हैं ताकि एक सुरक्षित, विश्वसनीय और पारदर्शी ऑनलाइन वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। नियमों के तहत, सभी मध्यस्थों को उपयोगकर्ताओं या पीड़ितों की शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान करने के लिए एक सशक्त शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023

11 अगस्त 2023 को लागू डीपीडीपी अधिनियम, 2023, डिजिटल माध्यमों से एकत्रित व्यक्तिगत डेटा से जानकारी निकाले जाने को नियंत्रित करता है, जिसमें ऑफलाइन स्रोतों से डिजिटाइज़ किया गया डेटा भी शामिल है। यह अधिनियम व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा और नवाचार, सेवा वितरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए डेटा के वैध उपयोग को सक्षम बनाने के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। यह सभी हितधारकों के लिए स्पष्टता, समझने में आसानी और व्यावहारिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सरल, सुलभ, तर्कसंगत और कार्रवाई योग्य (सरल) दृष्टिकोण का अनुसरण करता है। मूल रूप से, डीपीडीपी अधिनियम नागरिकों को डेटा प्रिंसिपल के रूप में सशक्त बनाता है, जिससे लोगों को स्पष्ट अधिकार, उनके व्यक्तिगत डेटा पर अधिक नियंत्रण और उन्हें भारत के डेटा संरक्षण ढांचे के केंद्र में रखा जाता है इस आश्वासन के साथ कि ऐसे डेटा को संभालने वाले संगठन जिम्मेदार, पारदर्शी और जवाबदेह बने रहेंगे।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025

13 नवंबर 2025 को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 को अधिसूचित किया गया था जो डीपीडीपी अधिनियम, 2023 को क्रियान्वित करते हुए देश के डेटा संरक्षण ढांचे को मजबूत बनाते हैं। ये नियम मिलकर एक स्पष्ट, नागरिक-केंद्रित व्यवस्था स्थापित करते हैं जो नवाचार और जिम्मेदार उपयोग को सक्षम बनाते हुए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करती है।

ये नियम नागरिकों को लागू करने योग्य अधिकार प्रदान करके, संगठनों की जवाबदेही बढ़ाकर और डेटा के दुरुपयोग तथा अनधिकृत शोषण पर अंकुश लगाकर व्यक्तियों को केंद्र में रखते हैं।

डीपीडीपी अधिनियम और नियम मिलकर नियामक स्पष्टता प्रदान करते हैं और नवाचार के साथ गोपनीयता को संतुलित करते हैं, जिससे एक सुरक्षित, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल अर्थव्यवस्था को मदद मिलती है।

कुल मिलाकर, ये रूपरेखाएं देश में डेटा प्रबंधन के लिए एक सुसंगत और दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। अधिकारों, जिम्मेदारियों और प्रवर्तन तंत्रों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके, ये उपाय संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करते हैं, नागरिकों को सशक्त बनाते हैं और डिजिटल प्रणालियों में विश्वास को बढ़ावा देते हैं। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और जटिलता लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में, यह मजबूत कानूनी और नियामक आधार यह सुनिश्चित करता है कि डेटा-आधारित नवाचार सुरक्षित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बना रहे, जिससे भारत एक लचीले और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल परितंत्र के लिए तत्पर हो सके।

डेटा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त राष्ट्रीय उपाय

भारत सरकार ने खुले, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट परितंत्र को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से साइबर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने, डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और साइबर जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं। बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए, निम्नलिखित उपाय लागू किए गए हैं:

  1. घटना निवारण, प्रतिक्रिया और सुरक्षा प्रबंधन आईटी अधिनियम, 2000 के तहत सीईआरटी-इन को साइबर सुरक्षा के लिए जिम्मेदार नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत के साइबरस्पेस को प्रमुखता से सुरक्षित करना और सक्रिय उपायों तथा प्रभावी सहयोग के जरिए देश के संचार और सूचना अवसंरचना की सुरक्षा को बढ़ाना है।
  2. साइबर और डेटा सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय समन्वय: गृह मंत्रालय ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4सी) की स्थापना की थी, जिसे अक्टूबर 2018 में अनुमोदित किया गया था। यह साइबर अपराधों की रोकथाम, पहचान और प्रतिक्रिया के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है, और बच्चों के विरूद्ध अपराधों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, और इसे प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और प्रवृत्ति विश्लेषण से मदद मिलती है। यह साइबर अपराधों की आसान रिपोर्टिंग को भी सुगम बनाता है, जन जागरूकता बढ़ाता है और साइबर फोरेंसिक, जांच और साइबर स्वच्छता में कानून प्रवर्तन अधिकारियों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की क्षमता को मजबूत करता है।
  3. नागरिक केंद्रित डेटा संरक्षण और धोखाधड़ी प्रतिक्रिया प्रणाली: जनवरी 2020 से चालू राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (सीएफसीएफआरएमएस) जैसे प्लेटफॉर्म साइबर घटनाओं और वित्तीय धोखाधड़ी की समय पर रिपोर्टिंग को सक्षम बनाते हैं, इसे राष्ट्रव्यापी हेल्पलाइन 1930 से मदद मिलती है। इससे बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा की सुरक्षा में मदद मिलती है।
  4. रीयल-टाइम हस्तक्षेप: सितंबर 2024 में शुरू किया गया एक समर्पित साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र (सीएफएमसी) बैंकों, वित्तीय संस्थानों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम डेटा साझाकरण और समन्वित प्रतिक्रिया को सुगम बनाता है, जिससे साइबर धोखाधड़ी में उपयोग किए जाने वाले खातों, सिम कार्डों और उपकरणों को तेजी से ब्लॉक करना संभव हो जाता है।
  5. डिजिटल अवसंरचना संरक्षण एवं प्रवर्तन उपकरण: सरकार ने गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री को शीघ्रता से हटाने के लिए सहयोग जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रवर्तन को मजबूत किया है, और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से विकसित संदिग्ध रजिस्ट्री का उपयोग अवैध खातों और धोखाधड़ी से जुड़े डिजिटल पहचानकर्ताओं की पहचान और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त, आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और विदेशी सुरक्षा समाधानों पर निर्भरता को कम करने के लिए उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (सी-डीएसी) द्वारा स्वदेशी साइबर सुरक्षा उपकरण विकसित किए जा रहे हैं।
  6. साइबर फोरेंसिक और जांच: राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फोरेंसिक और जांच संबंधी सहायता प्रदान करती हैं, जिससे डेटा उल्लंघन विश्लेषण, साक्ष्य संरक्षण और साइबर घटना अभियोजन के लिए राष्ट्रीय क्षमता में वृद्धि होती है।
  7. डेटा-संचालित विश्लेषण: सितंबर 2024 में शुरू किया गया समन्वय प्लेटफॉर्म, साइबर अपराध डेटा के लिए एक राष्ट्रीय प्रबंधन सूचना प्रणाली और विश्लेषण प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जो अंतर-राज्यीय समन्वय, अपराध पैटर्न विश्लेषण और साइबर अपराध बुनियादी ढांचे की भू-मानचित्रण को सक्षम बनाता है ताकि डेटा-आधारित प्रवर्तन कार्यों का समर्थन किया जा सके।
  8. मानव एवं संस्थागत क्षमता: क्षमता निर्माण के प्रयासों के तहत मार्च 2019 में शुरू किया गया साईट्रेन डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और सितंबर 2024 में शुरू किया गया साइबर कमांडो कार्यक्रम जैसे प्रयास एक कुशल साइबर सुरक्षा कार्यबल को मजबूत कर रहे हैं। सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (आईएसईए) कार्यक्रम और इसके समर्पित पोर्टल (www.infosecawareness.in ) से इन्हें और बल मिल रहा है। वहीं, सीईआरटी-इन द्वारा सितंबर 2024 में शुरू किया गया प्रमाणित सुरक्षा पेशेवर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (सीएसपीएआई) कार्यक्रम पेशेवरों को एआई प्रणालियों को सुरक्षित करने और एआई से संबंधित उभरते साइबर खतरों से निपटने के लिए तैयार करता है।
  9. राष्ट्रीय जागरूकता अभियान: सीईआरटी-इन की नागरिक केंद्रित पहल साइबर स्वच्छता केंद्र (सीएसके) बॉटनेट क्लीनिंग और मैलवेयर विश्लेषण केंद्र के रूप में कार्य करता है। यह मैलवेयर का पता लगाने और उसे हटाने के लिए निःशुल्क उपकरण प्रदान करता है, साइबर सुरक्षा के सर्वोत्तम तरीकों का प्रसार करता है, और विभिन्न क्षेत्रों के संगठनों को बॉटनेट और मैलवेयर संक्रमणों के बारे में दैनिक अलर्ट और निवारणात्मक उपाय जारी करता है।

ये पहलें साइबर सुरक्षा के प्रति भारत सरकार के व्यापक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जिसमें मानक, क्षमता निर्माण, नागरिक जागरूकता और संकटकालीन तैयारी शामिल हैं। संस्थागत तंत्रों को मजबूत करके और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप ढलकर, भारत उभरते साइबर खतरों के मद्देनजर अपने डिजिटल परितंत्र में विश्वास, लचीलापन और सुरक्षा को लगातार बढ़ा रहा है।

डेटा गोपनीयता दिवस इस बात की याद दिलाता है कि विश्वास भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल परितंत्र की आधारशिला है। जैसे-जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना देश भर में शासन, सेवा वितरण और रोजमर्रा की जिंदगी को आकार दे रही है, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं बल्कि एक लोकतांत्रिक अनिवार्यता है। भारत के विकसित होते कानूनी ढांचे, मजबूत संस्थागत तंत्र और नागरिक केंद्रित पहलें यह सुनिश्चित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं कि डिजिटल नवाचार सुरक्षित, नैतिक और जवाबदेह बना रहे।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण ढांचा लागू होने, साइबर सुरक्षा संस्थानों को मजबूत करने और क्षमता निर्माण एवं जागरूकता पर निरंतर निवेश के साथ, देश एक सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल वातावरण की ओर तेजी से अग्रसर है। डेटा गोपनीयता के महत्व को पहचानना सरकार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी को मजबूत करता है कि वे व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करें, विश्वास कायम करें और यह सुनिश्चित करें कि भारत का डिजिटल परिवर्तन समावेशी, लचीला और नागरिक केंद्रित बना रहे।

-(PIB)

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