भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की विकसित आधार फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस तकनीक का उपयोग 102 करोड़ बार किया गया, जिससे कुल 130.5 करोड़ लेनदेन का नया रिकॉर्ड बना। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष कुल हुए आधार फेस ऑथेंटिकेशन में से 78% लेनदेन इसी साल हुए जो इसकी बढ़ती स्वीकृति और उपयोगिता को दर्शाता है।
वहीं जनवरी से मार्च 2025 के बीच 39.5 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन लेनदेन हुए, जिसमें अकेले मार्च 2025 में 15.25 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए। यह फरवरी 2025 की तुलना में 21.6% की वृद्धि को दर्शाता है। गौरतलब है कि इस तकनीक का उपयोग वित्तीय सेवाओं, टेलीकॉम और कई सरकारी योजनाओं में किया जा रहा है, जिससे लाभार्थियों तक सेवाएं बिना किसी बाधा के पहुंच रही हैं।
आधार फेस ऑथेंटिकेशन का उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों की दर्जनों योजनाओं में किया जा रहा है, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), प्रधानमंत्री ई-ड्राइव, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री किसान योजना और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना प्रमुख हैं। यह तकनीक उन लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो रही है, जिनके फिंगरप्रिंट सही तरह से स्कैन नहीं होते, जैसे वरिष्ठ नागरिक या वे लोग जो हाथों से श्रम करते हैं और जिनकी उंगलियों के निशान समय के साथ घिस जाते हैं।
वर्तमान में, 102 सरकारी और निजी संस्थाएं इस तकनीक का उपयोग कर रही हैं। यह Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर काम करती है और फर्जी वीडियो या फोटो के जरिए धोखाधड़ी से बचाने में सक्षम है। यह तकनीक संपर्क रहित है और इसे कहीं भी, कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है। UIDAI के अनुसार, यह तकनीक डिजिटल पहचान को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और तेज बना रही है। भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार और आधार-आधारित पहचान प्रणाली को मजबूत करने में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।-(Input With ANI)