भारतीय सांख्यिकी सेवा के 2026 बैच के 34 प्रशिक्षु अधिकारियों, जिनमें 16 महिला अधिकारी शामिल हैं, ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति ने उन्हें प्रतिष्ठित सेवा में शामिल होने पर बधाई दी और कहा कि महिलाओं का बढ़ता प्रतिनिधित्व भारत के महिला सशक्तिकरण से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ने का संकेत है।
सटीक आंकड़ों के बिना सही निर्णय संभव नहीं
उपराष्ट्रपति ने सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “यदि आंकड़े सही नहीं हैं, तो कोई भी निर्णय सही नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा कि विश्वसनीय आंकड़ों के बिना प्रभावी योजना बनाना, संसाधनों का आवंटन करना और सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू करना संभव नहीं है। लक्षित लाभार्थियों की सही पहचान नहीं होने पर सीमित संसाधनों का भी दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने कहा कि आंकड़े सटीक तरीके से एकत्र किए जाने चाहिए और सही समय पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
आंकड़े शासन के महत्वपूर्ण साधन
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आधिकारिक आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, बल्कि शासन के ऐसे महत्वपूर्ण साधन हैं, जो सरकार को देश और समाज के विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करते हैं। सरकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षेत्रीय अनुभव, आंकड़ों का सटीक संग्रह, उनका उचित रखरखाव और समय पर प्रस्तुतीकरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता या विफलता काफी हद तक आंकड़ों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का अपेक्षित लाभ पहुंचाने में सांख्यिकीविदों की अहम भूमिका है।
डिजिटल आंकड़ा तंत्र को मजबूत करने पर जोर
उपराष्ट्रपति ने भारत के सांख्यिकीय और प्रशासनिक आंकड़ा तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल डेटाबेस, जीएसटी आंकड़ों और उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक आंकड़ों को इसके महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने डिजिटल लेन-देन के विस्तार को गति दी है और समानांतर अर्थव्यवस्था को कम करने में मदद की है।
आर्थिक विकास के साथ मानव कल्याण भी जरूरी
सी. पी. राधाकृष्णन ने आर्थिक गणनाओं के लिए उपयुक्त आधार वर्ष और देश की वास्तविक विकास दर के सटीक आकलन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक संकेतक मानव कल्याण की पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं कर सकते। खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानदंड भी विकास के आकलन में महत्वपूर्ण हैं।
आंकड़ों में विश्वास सबसे जरूरी
उपराष्ट्रपति ने कहा कि “सांख्यिकी का मूल्य विश्वास से निर्धारित होता है।” उन्होंने युवा अधिकारियों से पेशेवर और नैतिक सत्यनिष्ठा, राजनीतिक तटस्थता, गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि औपचारिक शिष्टाचार से अधिक महत्वपूर्ण अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक और ईमानदारी से निर्वहन करना है।
क्षेत्रीय अनुभव से सीखने की सलाह
राधाकृष्णन ने प्रशिक्षु अधिकारियों से निरंतर सीखने की आदत विकसित करने और क्षेत्रीय अनुभव हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को वरिष्ठों, सहकर्मियों और अधीनस्थों से सीखने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से जिज्ञासु, मेहनती और नवाचार के प्रति खुले विचारों वाला बने रहने तथा पेशेवर स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं करने की अपील की।
विकसित भारत के लिए आंकड़ा आधारित व्यवस्था
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘विकास के लिए आंकड़े’ और आंकड़ा-आधारित निर्णय विकसित भारत@2047 के लिए मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली तैयार करने में महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि 2026 बैच के अधिकारी भारतीय सांख्यिकी सेवा की उत्कृष्ट परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे और ऐसी आंकड़ा-आधारित व्यवस्था के निर्माण में योगदान देंगे, जो लोगों तक ठोस लाभ पहुंचाने में सक्षम हो।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग, डेटा गवर्नेंस के महानिदेशक पी. आर. मेश्राम, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय सांख्यिकी सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे। (इनपुट: पीआईबी)


