म्यांमार की सैन्य सरकार ने 22 अप्रैल तक के लिए अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा की है। यह फैसला देश में आए भीषण भूकंप के बाद राहत और पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए लिया गया है। इस आपदा में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, 4,715 लोग घायल हुए हैं और 341 लोग लापता हैं।
सैन्य सरकार ने अपने बयान में कहा कि यह संघर्ष विराम भूकंप प्रभावित लोगों की मदद और देश में शांति बनाए रखने के लिए लागू किया गया है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया कि यदि कोई सशस्त्र समूह संघर्ष विराम के नियमों का उल्लंघन करता है या हिंसा फैलाने की कोशिश करता है, तो सेना सुरक्षा कदम उठाएगी।
28 मार्च को आए इस विनाशकारी भूकंप और उसके तुरंत बाद 6.4 तीव्रता के आफ्टरशॉक ने मांडले सहित कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। सड़कों, पुलों और इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं। म्यांमार के मौसम विभाग के अनुसार, अब तक 66 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई है।
इससे पहले, म्यांमार के प्रधानमंत्री और सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग ने संघर्ष विराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। उनका कहना था कि कुछ सशस्त्र समूह भले ही सीधे युद्ध में शामिल न हों, लेकिन वे हमले की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इस बार सरकार ने भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए संघर्ष विराम का फैसला किया है।
सरकार ने सशस्त्र गुटों को चेतावनी दी है कि इस दौरान वे नागरिकों की आवाजाही में बाधा न डालें, आम लोगों या उनकी संपत्तियों को नुकसान न पहुंचाएं और सैन्य ठिकानों पर हमला न करें। अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो सेना कार्रवाई करेगी। -(Input With IANS)