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खनिज सुरक्षा मजबूत करने के लिए मिशन मोड में काम करें एजेंसियां: रेड्डी

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने बेंगलुरु में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के दौरान मंत्रालय के तहत आने वाली सभी खनन और अन्वेषण एजेंसियों को लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि भारत की खनिज सुरक्षा और रणनीतिक विकास लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए सभी संगठनों को मिशन मोड में काम करना होगा। मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि तकनीक, पारदर्शिता और दक्षता हर संस्थागत प्रक्रिया की नींव बननी चाहिए।

बैठकों में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, राष्ट्रीय शिला यांत्रिकी संस्थान, भारतीय खान ब्यूरो और रिमोट सेंसिंग एवं एरियल सर्वे डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। समीक्षा के दौरान खनिज अन्वेषण, वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने तथा टिकाऊ खनन पद्धतियों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

बैठक में दुर्लभ मृदा तत्व, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, टंगस्टन, वैनेडियम और प्लेटिनम समूह जैसे महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों पर चल रही परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया।

जी. किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश के औद्योगिक विस्तार और भविष्य की विकास जरूरतों को पूरा करने में खनन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग और एडवांस्ड जियोसाइंस एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की खनिज खोज तकनीक आधारित प्रणालियों पर निर्भर करेगी और भारतीय संस्थानों को इस बदलाव का नेतृत्व करना होगा।

समीक्षा के दौरान जीएसआई ने कर्नाटक और गोवा में सोना, तांबा, निकेल, कोबाल्ट और प्लेटिनम समूह खनिज क्षेत्रों की पहचान समेत कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों की जानकारी दी। वहीं भारतीय खान ब्यूरो ने सतत खनन, खदान बंदी, खनिज संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ी प्रगति पेश की।

बेंगलुरु दौरे के दौरान मंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय केंद्र का भी दौरा किया और श्री श्री रविशंकर से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। जी. किशन रेड्डी ने कहा कि विकसित भारत 2047 की यात्रा केवल आर्थिक प्रगति और तकनीकी विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्य और समाज सेवा की भावना भी शामिल होनी चाहिए।

-(PIB)