वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज बुधवार को जर्मनी के विदेश मंत्री डॉ. जोहान वेडफुल से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और जर्मनी के बीच व्यापार बढ़ाना, निवेश प्रवाह मजबूत करना और नवाचार, तकनीक व टिकाऊ विकास जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना रहा। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भरोसा जताया कि भारत-जर्मनी साझेदारी आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी।
डॉ. वेडफुल के साथ जर्मनी से एक उच्च स्तरीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आया था। इसमें थिसेनक्रुप, सीमेंस मोबिलिटी, एलियांस और फ्लिक्स एसई जैसी बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल थे। बैठक के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय उद्योग से जुड़े कारोबारियों से भी बातचीत की, जिनमें ऑटोमोबाइल पार्ट्स, हेल्थकेयर, स्टील और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों की कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके साथ ही बैठक में दोनों पक्षों ने मजबूत सप्लाई चेन और बिजनेस-टू-बिजनेस सहयोग पर जोर दिया। साथ ही भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द और महत्वाकांक्षी तरीके से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसके अलावा माइग्रेशन, मोबिलिटी और भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ में झेलने वाले गैर-शुल्क अवरोधों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई और इन समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने पर सहमति बनी।
इस बीच पीयूष गोयल ने कहा कि जर्मन कंपनियां भारत में अपने निवेश और विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने की योजना बना रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है और देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है और वैश्विक वृद्धि में लगभग 20 प्रतिशत योगदान देगा।
गोयल ने जर्मन प्रतिनिधिमंडल को सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया और भारतीय उद्योग के साथ व्यापक सहयोग का आह्वान किया। वहीं, जर्मन कारोबारी नेताओं ने भारत की विकास यात्रा पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में साझेदारी निभाते रहेंगे।-(ANI)


