रांची में कृषि अनुसंधान को नई ताकत, शिवराज सिंह चौहान ने ICAR-IIAB की सुविधाओं का किया उद्घाटन

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रांची स्थित आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB) की विभिन्न नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों के लगभग 1,500 किसानों की भागीदारी में प्री-रबी किसान गोष्ठी-सह-कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना, उन्नत कृषि तकनीकों को खेतों तक पहुंचाना और किसान, वैज्ञानिक तथा नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को मजबूत करना था।

संस्थान को मिलीं आधुनिक सुविधाएं, 119 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा गेस्ट हाउस

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संस्थान के एडमिन-कम-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया। इसके साथ ही नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, इस परियोजना की लागत 119 करोड़ रुपए है। ये सुविधाएं संस्थान में अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के साथ वैज्ञानिक गतिविधियों को मजबूत करने में सहायक होंगी।

पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक खेती अपनाने पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड की समृद्ध प्राकृतिक और पारंपरिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनजातीय परंपराओं में जल, पौधों और प्रकृति के संरक्षण की गहरी समझ मौजूद है। उन्होंने ICAR-IIAB को अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता के संगम के रूप में रेखांकित किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौजूदा कृषि चुनौतियों का सामना करने के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित खेती को अपनाना जरूरी है। उन्होंने झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप फसलों एवं किस्मों के चयन, किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि अनुसंधान संस्थानों की तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

एकीकृत कृषि प्रणाली और संतुलित उर्वरक उपयोग जरूरी

शिवराज सिंह चौहान ने सब्जियों, अनाज और पशुधन को शामिल करते हुए एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, उर्वरकों के उचित उपयोग और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने की जरूरत भी बताई। साथ ही किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक गांव तक पहुंचाने और आगामी रबी मौसम के लिए किसानों को वैज्ञानिक जानकारी एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आह्वान किया।

‘लैब टू लैंड’ के प्रयासों की सराहना, खेत बचाओ अभियान का आह्वान

केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब नई तकनीकें किसानों के खेतों तक पहुंचेंगी और उनकी उत्पादकता तथा आय बढ़ाने में मदद करेंगी। उन्होंने आगामी दिनों में देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू करने का भी आह्वान किया। उनका जोर ऐसी कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने पर रहा, जिनसे मिट्टी की उर्वरता, कृषि संसाधनों और किसानों की आजीविका का संरक्षण हो सके।

भागीरथ चौधरी ने आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने देश की खाद्य सुरक्षा और विकास में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और कृषि विज्ञान केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के साथ किसानों को अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों से किसानों को सुरक्षित रखने तथा सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी बताई।

झारखंड में कृषि अनुसंधान और नई तकनीकों के विस्तार पर जोर

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने पूर्वी भारत में कृषि क्षेत्र में नई क्रांति की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने झारखंड में कृषि अनुसंधान और ज्ञान संस्थानों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दूसरी फसलों की खेती को बढ़ावा देने, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसलों एवं किस्मों का चयन करने और पशुधन उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने अम्लीय मिट्टी तथा फास्फोरस की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की बात कही। साथ ही आगामी रबी मौसम की बेहतर योजना बनाने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया।

किसानों की जरूरतों के अनुरूप हो कृषि अनुसंधान

ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने कृषि अनुसंधान को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान से विकसित तकनीकों का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों के विकास, उचित मार्गदर्शन और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उनके लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

कृषि अनुसंधान केंद्रों और एकीकृत कृषि इकाइयों का किया अवलोकन

कार्यक्रम से पहले भागीरथ चौधरी ने डॉ. एम. एल. जाट, डॉ. डी. के. यादव, ICAR-IIAB के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित और संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. विजय पाल भदाना के साथ संस्थान की विभिन्न सुविधाओं का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने डेयरी फार्म, फसल अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी और एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) इकाई का भ्रमण किया। डेयरी फार्म में उन्हें पशुधन के आनुवंशिक सुधार के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक की जानकारी दी गई।

एकीकृत कृषि प्रणाली इकाई में उन्होंने किसानों से संवाद किया और कृषि अपशिष्ट के पुनर्चक्रण, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा एकीकृत खेती की संभावनाओं को समझा। उन्होंने पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लेने के साथ प्रगतिशील किसानों से भी बातचीत की। इस अवसर पर ICAR संस्थानों और झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों ने कृषि फसलों, पशुधन, डेयरी तकनीकों, अनुसंधान उपलब्धियों, सरकारी योजनाओं और किसानोन्मुख नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई।

किसान गोष्ठी में फसल विविधीकरण से लेकर पशुपालन तक की जानकारी

प्री-रबी किसान गोष्ठी में किसानों को किसान उत्पादक संगठनों के अवसर, एथनो-वेटरिनरी मेडिसिन, डेयरी फार्मिंग, फल फसलों की उत्पादन तकनीक, रबी फसलों में समेकित कीट प्रबंधन (IPM), फसल विविधीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, पशुधन आहार प्रबंधन और लाख की खेती जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। किसानों ने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संवाद कर उन्नत कृषि एवं पशुपालन पद्धतियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को आगामी रबी मौसम की तैयारी, फसल प्रबंधन और उपलब्ध कृषि संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के प्रति जागरूक किया गया।

किसानों के बीच उन्नत बीज और कृषि इनपुट वितरित

कार्यक्रम के दौरान किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, मिनरल मिक्सचर, उन्नत बीज, गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के बीज किट वितरित किए गए। इसके अलावा मिल्क कैन कूलर तथा उच्च उत्पादकता वाली टमाटर और बैंगन की बीज किस्मों सहित विभिन्न कृषि एवं पशुधन इनपुट भी उपलब्ध कराए गए। इस अवसर पर ICAR संस्थानों द्वारा विकसित विभिन्न प्रकाशनों और प्रौद्योगिकियों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि संसाधनों से जोड़कर खेती की उत्पादकता और टिकाऊपन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था।

संस्थान के विकास में योगदान देने वाले पूर्व अधिकारियों का सम्मान

कार्यक्रम में ICAR-IIAB के विकास और संस्थान के प्रति योगदान के लिए डॉ. आर. रमानी, पूर्व अधिकारी विशेष कार्य; डॉ. के. के. शर्मा, पूर्व निदेशक (प्रभारी); डॉ. तिलक राज शर्मा, पूर्व कार्यवाहक निदेशक एवं संयुक्त निदेशक (अनुसंधान); और संस्थान के प्रथम नियमित निदेशक डॉ. अरुणव पटनायक को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में ICAR-IIAB के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने झारखंड के किसानों के हित में किसान, वैज्ञानिक और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को मजबूत करने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कृषि अनुसंधान एवं नवाचार को खेतों तक पहुंचाने और किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। (इनपुट: पीआईबी)