साल 2047 को लक्ष्य बनाकर केंद्र सरकार हर क्षेत्र में तेज गति से आगे बढ़ रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इस बदलाव का प्रमुख आधार बनकर उभर रहा है। सरकार का मानना है कि एआई के बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। देश में एआई युग की शुरुआत हो चुकी है और अब इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
भारत एआई पावर सेंटर बनने की राह पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एआई परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। पहली बार सरकार सक्रिय रूप से एआई इकोसिस्टम को आकार दे रही है, जहां कंप्यूटिंग पावर, जीपीयू और अनुसंधान के अवसर किफायती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से छात्रों, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को विश्वस्तरीय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जा रहा है। इंडिया एआई मिशन और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना जैसी पहल देश को एआई पावरहाउस बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
इंडिया एआई मिशन को कैबिनेट की मंजूरी
मार्च 2024 में कैबिनेट ने “भारत में एआई के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना और एआई को भारत के लिए कारगर बनाना” के विजन के तहत इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी। इस मिशन का पांच वर्षों के लिए 10,371.92 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।
शुरुआती लक्ष्य 10,000 जीपीयू का था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 38,000 जीपीयू तक पहुंच चुकी है, जिससे विश्वस्तरीय एआई संसाधनों तक किफायती पहुंच संभव हो रही है।
इंडिया एआई मिशन के सात स्तंभ
इंडिया एआई मिशन सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है: इंडिया एआई कंप्यूट, एआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट पहल, एआईकोश, इंडिया एआई फाउंडेशन मॉडल्स, इंडिया एआई फ्यूचर स्किल्स, इंडिया एआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई। इन पहलों का उद्देश्य एआई अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना है।
तेजी से बढ़ता भारतीय एआई इकोसिस्टम
भारत का प्रौद्योगिकी और एआई इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। इस क्षेत्र में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। देश में 1,800 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, जिनमें 500 से अधिक एआई पर केंद्रित हैं।
भारत में करीब 1.8 लाख स्टार्टअप्स सक्रिय हैं और पिछले वर्ष लॉन्च हुए नए स्टार्टअप्स में से लगभग 89% ने अपने उत्पादों या सेवाओं में एआई का उपयोग किया। औद्योगिक व ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएं, बैंकिंग-बीमा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्र एआई अपनाने में अग्रणी हैं और कुल एआई मूल्य का लगभग 60% योगदान करते हैं। बीसीजी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 26% भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर एआई परिपक्वता हासिल कर चुकी हैं।
एआई का वैश्विक और भारतीय इतिहास
एआई की शुरुआत 1950 के दशक में एलन ट्यूरिंग और जॉन मेकार्थी जैसे वैज्ञानिकों के शोध से हुई। 1956 की डार्टमाउथ कॉन्फ्रेंस में इसे आधिकारिक रूप से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ नाम दिया गया। 1970-80 के दशक में ‘एआई विंटर’ का दौर आया, लेकिन 1990 के बाद मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के साथ इसमें तेज प्रगति हुई।
भारत में 1960 के दशक में प्रोफेसर एच. एन. महाबला के कार्यों से एआई की शुरुआत मानी जाती है। वर्तमान में नीति आयोग एआई विकास को बढ़ावा दे रहा है, जिससे 2035 तक जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 पर नजर
16-20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित होने जा रहा है। इसे अब तक के चार वैश्विक एआई सम्मेलनों में सबसे बड़ा माना जा रहा है। इस सम्मेलन में 35,000 से अधिक पंजीकरण दर्ज किए जा चुके हैं। इसमें विजन को जमीन पर उतारने और ठोस परिणामों पर विशेष जोर दिया जाएगा। (इनपुट: आईएएनएस)


