ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सुरक्षा में एआई की अहम भूमिका

नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ के दौरान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने “AI for Our Oceans of Tomorrow: Data, Models and Governance” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की। इस चर्चा में विशेषज्ञों ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत की समुद्री शासन व्यवस्था, आपदा तैयारी, समुद्री आजीविका और ब्लू इकोनॉमी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, स्टार्टअप और वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा का मुख्य उद्देश्य समुद्री विज्ञान और नीतियों में एआई के उपयोग को बढ़ावा देना था।

मुख्य भाषण में भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. मोहापात्रा ने कहा कि महासागर जलवायु संतुलन, आपदा जोखिम कम करने, खाद्य सुरक्षा और आजीविका के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि समुद्री निगरानी, चक्रवात पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में भारत की क्षमताएं मजबूत हुई हैं, जिससे प्राकृतिक आपदाओं में जान-माल का नुकसान काफी कम हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के तापमान में वृद्धि, अम्लीकरण और समुद्र स्तर बढ़ने जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए डेटा आधारित और एआई समर्थित मॉडल जरूरी हैं। ‘डीप ओशन मिशन’ को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल बताया गया, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र की खोज, जैव विविधता संरक्षण और समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग है।

नॉर्वे की भारत में राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने भारत-नॉर्वे सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि एआई से मत्स्य प्रबंधन, पोर्ट संचालन और तटीय सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता उसे वैश्विक डिजिटल ओशन फ्रेमवर्क विकसित करने में सक्षम बनाती है।

पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ के देशों का नेतृत्व कर सकता है, यदि वह ओपन डेटा, एआई आधारित विश्लेषण और मजबूत प्रशासनिक ढांचे के साथ डिजिटल ओशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करे। एआई समुद्री आजीविका बढ़ाने, लागत कम करने और समय पर निर्णय लेने में मददगार साबित होगा।

विशेषज्ञों ने यह भी माना कि समुद्री क्षेत्र अभी भी जटिल और डेटा की कमी वाला क्षेत्र है, इसलिए फिजिक्स आधारित एआई मॉडल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उचित नीतियों और निवेश के साथ ब्लू इकोनॉमी भारत और ग्लोबल साउथ के लिए रोजगार और विकास का बड़ा स्रोत बन सकती है।

सत्र के अंत में मंत्रालय के सलाहकार डॉ. पी.के. श्रीवास्तव ने कहा कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय समुद्री कार्यक्रमों में एआई के व्यापक उपयोग के लिए स्पष्ट और व्यवस्थित रोडमैप तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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