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2030 तक 30 अरब डॉलर का मेडिकल डिवाइस बाजार बनाने का लक्ष्य

भारत का मेडिकल डिवाइस निर्यात वित्त वर्ष 2025 में 4 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। सरकार अब 2030 तक देश में 30 अरब डॉलर का मेडिकल डिवाइस बाजार विकसित करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

यह जानकारी वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित “भारत के मेडिकल डिवाइस निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने” विषय पर चिंतन शिविर के दौरान सामने आई। इस कार्यक्रम का आयोजन वाणिज्य विभाग, औषधि विभाग और मेडिकल डिवाइस निर्यात संवर्धन परिषद के सहयोग से किया गया।

इस बैठक में नीति निर्माता, नियामक, उद्योग प्रतिनिधि, निर्यातक और क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए।

वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में प्रयास

अधिकारियों के अनुसार भारत का मेडिकल डिवाइस क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। दुनिया भर में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा तकनीक की बढ़ती मांग के बीच भारत खुद को एक भरोसेमंद विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।

गुणवत्ता और सहयोग पर जोर

औषधि विभाग के संयुक्त सचिव अमन शर्मा ने कहा कि देश में मेडिकल डिवाइस निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए उद्योग और नियामक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

निर्यात बढ़ाने की रणनीति

विदेश व्यापार महानिदेशालय के महानिदेशक लव अग्रवाल ने कहा कि भारत को वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए संरचनात्मक चुनौतियों को दूर करना होगा। उन्होंने निर्यात बढ़ाने के लिए व्यापार नीति और निर्यात प्रोत्साहन उपायों की भूमिका पर भी जोर दिया।

मेडटेक हब बनने का लक्ष्य

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत को केवल “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” की पहचान से आगे बढ़कर वैश्विक मेडटेक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि अगले दशक में उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, अनुसंधान और विकास, नवाचार और नियामकीय समन्वय पर ध्यान देकर भारत की वैश्विक हिस्सेदारी को बढ़ाया जा सकता है।

उद्योग–सरकार सहयोग जरूरी

मेडिकल डिवाइस उद्योग संगठन के प्रतिनिधि राजीव नाथ ने कहा कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ाने और वैश्विक नियामकीय चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और उद्योग के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है।

-(इनपुटःएजेंसी)