एयर इंडिया की वाइड-बॉडी सेवाओं में 12 से 17 जून तक कुल 83 उड़ानें रद्द हुईं हैं, जिनमें से 66 उड़ानें बोइंग 787 विमान की है। यह जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने मंगलवार को दी। DGCA ने एयर इंडिया लिमिटेड और एयर इंडिया एक्सप्रेस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। एयर इंडिया समूह प्रतिदिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर मिलाकर 1,000 से अधिक उड़ानें संचालित कर रहा है। इस बैठक का उद्देश्य परिचालन में सुधार और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना था।
DGCA ने बताया कि बोइंग 787 के पूरे बेड़े की विशेष सुरक्षा जांच (Enhanced Safety Inspection) शुरू की गई है। एयर इंडिया के पास कुल 33 बोइंग 787 विमान हैं, जिनमें से 4 विमान अभी विभिन्न MRO (Maintenance, Repair, Overhaul) केंद्रों में बड़े निरीक्षण के लिए रखे गए हैं। 17 जून शाम 3 बजे तक 24 विमानों की जांच पूरी कर ली गई थी। 2 और विमानों की जांच उसी दिन पूरी होनी थी, जबकि एक अन्य की जांच अगले दिन के लिए निर्धारित थी। बाकी बचे 6 विमानों में से 2 दिल्ली एयरपोर्ट पर AOG (Aircraft on Ground) स्थिति में हैं और उनकी जांच तब की जाएगी जब वे सेवा में लौटने के लिए तैयार होंगे। बाकी 4 विमानों की जांच उनके MRO केंद्रों में रिलीज से पहले की जाएगी।
DGCA ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक की गई जांच में एयर इंडिया के बोइंग 787 विमानों या उनके रखरखाव सिस्टम में कोई बड़ी सुरक्षा खामी नहीं पाई गई है। सभी विमान वर्तमान सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं। हाल ही में ईरानी हवाई क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंधों और बंदी की वजह से कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा या रद्द करना पड़ा। DGCA ने कहा कि ऐसे मामलों में एयरलाइंस को यात्रियों और क्रू को समय रहते सूचित करना चाहिए और वैकल्पिक रूट की रणनीति अपनाकर यात्रा बाधा को कम करना चाहिए।
बैठक में 7 प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई, जिनका मकसद एयरलाइनों की परिचालन विश्वसनीयता को बढ़ाना और यात्रियों को बेहतर सेवाएं देना था। DGCA ने एयरलाइंस को निर्देश दिया कि उड़ानों में देरी या रद्द होने की स्थिति में यात्रियों को पहले से सूचना देना उनकी कानूनी जिम्मेदारी है।-(ANI)


