केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान’ के तहत संचालित होने वाली एयरलाइंस को दी जाने वाली वित्तीय सहायता की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू होगा, जिससे क्षेत्रीय हवाई मार्गों को आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य बनाया जा सके।
उड़ान योजना को 10 साल के लिए बढ़ाया गया
उड़ान योजना पर आयोजित कार्यशाला के दौरान पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस योजना की अवधि अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ा दी है। इसके साथ ही वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के पात्रता मानदंडों में भी बदलाव किया गया है, ताकि अधिक हवाई अड्डों और क्षेत्रीय रूट्स को इसका लाभ मिल सके।
वीजीएफ के पात्रता मानदंड में बदलाव
राम मोहन नायडू ने बताया कि पहले किसी एयरपोर्ट को ‘अनसर्व्ड’ या ‘अंडरसर्व्ड’ तब माना जाता था, जब वहां सप्ताह में 7 से कम उड़ानें संचालित होती थीं। अब इस सीमा को बढ़ाकर 14 उड़ानें प्रति सप्ताह कर दिया गया है। इससे अधिक हवाई अड्डे और क्षेत्रीय रूट्स वीजीएफ सहायता के दायरे में आएंगे।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर सरकार का फोकस
उन्होंने कहा कि देश में तेजी से हवाई अड्डों का विकास किया जा रहा है और लगभग हर महीने एक नया एयरपोर्ट या नया टर्मिनल तैयार हो रहा है। अब सरकार का मुख्य फोकस क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने पर है, जिसके लिए उड़ान योजना में कई अहम बदलाव किए गए हैं।
घाटे वाले एयरपोर्ट को मिलेगी ओएंडएम सहायता
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के उन हवाई अड्डों को संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) सहायता दी जाएगी, जो कम यात्री संख्या के कारण घाटे में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन एयरपोर्ट्स के लिए संचालन खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है, उन्हें सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी ताकि सेवाएं निर्बाध जारी रह सकें।
100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य
राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्यों के साथ घनिष्ठ समन्वय आवश्यक होगा।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रही भागीदारी
उन्होंने बताया कि उड़ान योजना पर आयोजित कार्यशाला में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 100% भागीदारी रही। उनके अनुसार, यह योजना के प्रति राज्यों की सकारात्मक सोच और केंद्र-राज्य के बेहतर सहयोग का संकेत है।
डायनेमिक फेयर प्राइसिंग पर सरकार का पक्ष
हवाई किरायों में बढ़ोतरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र से विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकार अदालत के समक्ष अपना नियामकीय ढांचा स्पष्ट करेगी। उन्होंने कहा कि डायनेमिक फेयर प्राइसिंग वैश्विक स्तर पर अपनाई जाने वाली व्यवस्था है और विमानन क्षेत्र के विकास तथा बेहतर हवाई कनेक्टिविटी के लिए यह जरूरी है। इसी वजह से भारत में भी एयरलाइंस को डायनेमिक किराया निर्धारण की अनुमति दी गई है। (इनपुट: आईएएनएस)


