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इंस्टाग्राम-फेसबुक पर आपत्तिजनक सामग्री के आरोप, एनएचआरसी ने मेटा को फिर भेजा नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कथित बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के प्रसार को लेकर मेटा के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। आयोग ने 3 अगस्त को इस मामले में नया नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है।

एनएचआरसी ने यह कदम एक गैर-लाभकारी संस्था की शिकायत पर उठाया है। संस्था को एक गुमनाम सूचना मिली थी, जिसमें इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अश्लील तथा आयु के अनुरूप नहीं माने जाने वाले लिंक साझा किए गए थे। संस्था ने स्पष्ट किया कि उसने POCSO अधिनियम, 2012 और आईटी अधिनियम, 2000 का पालन करते हुए इन लिंक को न तो देखा, न डाउनलोड किया और न ही संग्रहीत किया।

आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, हरियाणा, ओडिशा और दिल्ली के पुलिस महानिदेशकों तथा मेटा इंडिया के हेड ऑफ लॉ एन्फोर्समेंट को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

एनएचआरसी ने संबंधित राज्यों की पुलिस को साइबर अपराध इकाइयों के माध्यम से इन यूआरएल की जांच करने, संज्ञेय अपराध मिलने पर एफआईआर दर्ज करने, आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई करने तथा किसी भी पीड़ित बच्चे को तत्काल बचाकर बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने MeitY को संदिग्ध लिंक ब्लॉक करने, मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के खिलाफ की गई कार्रवाई तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाए गए दीर्घकालिक कदमों की जानकारी देने को कहा है।

मेटा को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित सामग्री तत्काल हटाए, मेटाडेटा और आईपी लॉग सुरक्षित रखे, POCSO अधिनियम की धारा 19 के तहत रिपोर्ट करे तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों का विवरण प्रस्तुत करे।

यह कार्रवाई 8 जुलाई को जारी किए गए पहले नोटिस के बाद की गई है। उस समय एनएचआरसी ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर भुगतान किए गए विज्ञापनों के जरिए “रेप वीडियो” और “चाइल्ड वीडियो” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जा रहा था, जहां कथित तौर पर ऐसी सामग्री बेची जा रही थी।

आयोग के निर्देशों के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने प्राथमिकता के आधार पर जांच शुरू कर दी है और POCSO अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत मेटा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

एनएचआरसी ने 29 जुलाई को दिल्ली पुलिस को कार्रवाई रिपोर्ट समय पर न देने पर अनुस्मारक भी जारी किया था और चेतावनी दी थी कि निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं मिलने पर मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत आयोग अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

इस बीच, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े आरोपों की औपचारिक जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। आयोग ने जुलाई में मेटा से स्पष्टीकरण मांगा था और कंपनी के जवाब का अध्ययन करने के बाद विस्तृत जांच कराने का फैसला किया है।

-IANS