अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए शुक्रवार को कई बैंकों, कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। ट्रंप प्रशासन के इस ताजा कदम में एक इराकी बैंक, ईरान से जुड़े ऑफशोर बैंक, दुबई में सक्रिय ईरानी तेल कारोबारी नेटवर्क, हांगकांग की एक फ्रंट कंपनी और क्यूबा के सरकारी बैंक को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, “ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है और उसके तथाकथित सहयोगी भी अब उसे नहीं बचा सकते।” उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक ईरानी सरकार के आर्थिक संसाधन खत्म नहीं हो जाते और उसकी सैन्य गतिविधियों को सहारा देने वाले सभी वित्तीय रास्ते बंद नहीं कर दिए जाते।
सैकड़ों मिलियन डॉलर का नेटवर्क ध्वस्त करने का दावा
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन नेटवर्कों ने मध्य पूर्व और एशिया में शेल कंपनियों तथा विदेशी मुद्रा कारोबारियों के जरिए सैकड़ों मिलियन डॉलर का लेन-देन किया है। प्रतिबंधित लोगों में सैयद रूहोल्लाह रजावी भी शामिल हैं, जिन्हें अधिकारियों ने ईरानी सरकार के प्रमुख तेल कारोबारियों में से एक बताया है। रजावी दुबई में रहते हैं और पहले प्रतिबंधों से पहले ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी की ओर से हर महीने लाखों बैरल तेल विदेश भेजने का काम करते थे। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ऐसे नेटवर्क हांगकांग के रास्ते धन को यूएई और तुर्किये तक पहुंचाते हैं, जहां उसे सोने और नकदी में बदला जाता है। इसके बाद यह धन ‘माहान एयर’ की उड़ानों के जरिए ईरान और उसके समर्थक समूहों तक भेजा जाता है।
किन-किन पर लगे प्रतिबंध?
– हांगकांग स्थित ‘एलीटस्फीयर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड’ पर प्रतिबंध। आरोप है कि यह ईरान के ‘शहर बैंक’ से जुड़े नेटवर्क के लिए धन का लेन-देन कर रही थी।
– दुबई निवासी ईरानी-डोमिनिकन नागरिक सादेघ बावी पर भी कार्रवाई। अमेरिका का आरोप है कि वे आईआरजीसी-कुद्स फोर्स से जुड़ी गतिविधियों में मदद कर रहे थे।
– इराक स्थित इंटरनेशनल डेवलपमेंट बैंक फॉर इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस पर प्रतिबंध। आरोप है कि यह बैंक ईरान को अमेरिकी डॉलर उपलब्ध करा रहा था।
– ईरान के दो ऑफशोर बैंक— जजीरेह इंटरनेशनल बैंक कंपनी और चाबहार इंटरनेशनल बैंक ओवरसीज कंपनी भी प्रतिबंधों के दायरे में आए।
क्यूबा के बैंक पर भी कार्रवाई
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अलग से क्यूबा के सरकारी बैंक बैंको इंटरनेशनल डी कॉमर्सियो एस.ए. (बीआईसीएसए) पर प्रतिबंधों की घोषणा की। रुबियो का आरोप है कि यह बैंक 2022 से ईरान के पहले से प्रतिबंधित कराफरीन बैंक को वित्तीय सेवाएं दे रहा था। उन्होंने कहा, “काफी लंबे समय से कम्युनिस्ट क्यूबा को ऐसे देशों और संगठनों के लिए ठिकाने की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अमेरिका के लिए खतरा पैदा करते हैं, जिनमें ईरान भी शामिल है।” रुबियो ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी तट से कुछ ही दूरी पर किसी भी विद्रोही राज्य को विदेशी सैन्य, खुफिया या आतंकी गतिविधियों की मेजबानी करने की छूट नहीं देगा।
द्वितीयक प्रतिबंध की चेतावनी और धार्मिक चैरिटी पर नजर
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि जिन विदेशी वित्तीय संस्थानों का संबंध प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं से पाया जाएगा, उन पर भी द्वितीयक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। एक अलग कदम में अमेरिकी वित्तीय अपराध प्रवर्तन नेटवर्क (फिनसेन) ने बैंकों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। उन्हें ऐसे लेन-देन की रिपोर्ट करने को कहा गया है, जिनमें ईरान धार्मिक चैरिटी नेटवर्क का दुरुपयोग कर रहा हो। अमेरिका को आशंका है कि ‘खुम्स’ जैसे धार्मिक योगदान का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
स्कॉट बेसेंट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में हम ईरानी सरकार को धार्मिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके अपने नेताओं को फायदा पहुंचाने और आतंकवाद के वित्तपोषण की अनुमति नहीं देंगे।”गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने 24 अगस्त को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ की शुरुआत की थी। इसका मकसद ईरान के उन वित्तीय और कारोबारी नेटवर्कों पर कार्रवाई करना है, जिनके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करता है। इससे पहले भी यूएई, हांगकांग, चीन और अन्य देशों में ईरान से जुड़े नेटवर्कों पर कार्रवाई हो चुकी है। (इनपुट-एजेंसी)


