सशस्त्र बलों का उच्चस्तरीय संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन 15 से 17 सितंबर तक पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित हुआ। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और भारत की रक्षा तैयारी के भविष्य का रोडमैप तय किया। इस वर्ष सम्मेलन का विषय- “Year of Reforms Transforming for the Future” यानी “सुधारों का वर्ष भविष्य के लिए परिवर्तन” था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर सशस्त्र बलों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय सेनाओं को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा और इसके लिए जाॅइंटनेस (संयुक्तता), नवाचार और आत्मनिर्भरता को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा,“भारत की सेनाएं गर्व का प्रतीक हैं। हमें अपनी संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए संयुक्तता, स्वदेशी क्षमता और नवाचार पर ध्यान देना होगा।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बदलते वैश्विक हालात में फुर्ती और लचीलापन (agility और resilience) की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सेनाओं को पारंपरिक युद्ध की अवधारणाओं से आगे बढ़कर नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। इसमें सूचना युद्ध, पारिस्थितिकीय युद्ध और जैविक युद्ध जैसे “अदृश्य खतरे” भी शामिल हैं। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बदलते हालात में सतर्क रहने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
सम्मेलन के दौरान कई अहम कार्यक्रम हुए। इसमें वायु रक्षा और काउंटर-ड्रोन ऑपरेशंस के लाइव प्रदर्शन, जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन का विमोचन और भविष्य के युद्ध, सूचना युद्ध और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस पर गहन चर्चाएं शामिल थीं। साथ ही, रक्षा खरीद सुधार, सेनाओं की तैयारी, पूर्व सैनिक कल्याण और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
मुख्य रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल अनिल चौहान ने हाल के वर्षों में किए गए सुधारों की समीक्षा पेश की। उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेनाओं को प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा और अंतरिक्ष, साइबर और सूचना क्षेत्रों में एकीकृत ऑपरेशंस को और मजबूत करना होगा। यह सम्मेलन भारत की सुरक्षा रणनीति को नई दिशा देने और सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हुआ।


