राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में उत्तर-पूर्वी राज्यों के कारीगरों और बुनकरों के एक समूह ने मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि कारीगर और बुनकर राष्ट्र की जीवंत विरासत के ज्वलंत उदाहरण हैं और देश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
‘एट होम’ रिसेप्शन में निभाई थी अहम भूमिका
इन कारीगरों और बुनकरों ने 26 जनवरी 2026 को आयोजित ‘एट होम’ रिसेप्शन के लिए निमंत्रण किट तैयार करने और उत्तर-पूर्व भारत की विविध कलात्मक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने में अहम योगदान दिया था। नागालैंड के कारीगरों ने केले के रेशे और बांस से टोकरियां तैयार कीं, जबकि असम के बुनकरों ने शॉल बनाए। मणिपुर के कारीगरों ने काली मिट्टी के बर्तन तैयार किए और सिक्किम के कारीगरों ने प्राकृतिक रेशों से विभिन्न उत्पाद बनाए।
राष्ट्रपति ने कारीगरों की सराहना की
असम, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम से आए कारीगरों एवं बुनकरों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता का भंडार है। उन्होंने कहा कि कारीगरों और बुनकरों को सहयोग और प्रोत्साहन देने की जरूरत है ताकि उनका कलात्मक ज्ञान अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें।
युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान
राष्ट्रपति ने कारीगरों और बुनकरों से अपनी अमूल्य परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं और हस्तशिल्प को संरक्षित रखना देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है।
राष्ट्रपति भवन और अमृत उद्यान का किया भ्रमण
बैठक के बाद कारीगरों और बुनकरों ने राष्ट्रपति भवन तथा अमृत उद्यान का भी निर्देशित दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति भवन की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को करीब से देखा। (इनपुट: पीआईबी)


