असम सरकार ने राज्य के बिजली क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी निवेश योजना की घोषणा की है। इसके तहत 77,353 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर जलविद्युत, सौर, तापीय और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के माध्यम से 8,457 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य की वर्तमान 450 मेगावाट उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 8,457 मेगावाट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 77 हजार करोड़ रुपये से अधिक का यह निवेश विकसित असम की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
राज्य का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री जयंत मल्लबरुआ ने कहा कि बिजली क्षेत्र में यह अब तक की सबसे बड़ी निवेश योजना है। इसका वित्तपोषण राज्य सरकार के संसाधनों, केंद्र प्रायोजित योजनाओं, बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि असम को पूर्वोत्तर भारत का हरित ऊर्जा केंद्र और बिजली अधिशेष राज्य बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में 4,900 मेगावाट क्षमता वाली चार पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें करीब 27,100 करोड़ रुपये का निजी निवेश होगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि 120 मेगावाट क्षमता वाली लोअर कोपिली जलविद्युत परियोजना परीक्षण चरण में पहुंच चुकी है और फिलहाल लगभग 55 मेगावाट बिजली ग्रिड को उपलब्ध करा रही है। इसके जुलाई 2026 में पूरी तरह शुरू होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि बिलासीपारा में 3,200 मेगावाट क्षमता के तापीय विद्युत संयंत्र की स्थापना की जाएगी, जिस पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 137.2 मेगावाट क्षमता वाली 11 नई जलविद्युत परियोजनाओं पर लगभग 2,617 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
सरकार अगले पांच वर्षों में राज्य के बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए 15,000 सर्किट किलोमीटर नई विद्युत पारेषण एवं वितरण लाइनें बिछाएगी, 120 नए उपकेंद्र स्थापित करेगी और 20,000 उच्च वोल्टेज वितरण ट्रांसफार्मर लगाएगी।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद असम पहली बार बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर और अधिशेष राज्य बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा।
(इनपुट-एएनआई )


