एसोचैम ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद के साथ किया MoU, FTA से व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने सोमवार को भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद (INZBC) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को प्रभावी ढंग से लागू करना और दोनों देशों के व्यवसायों को नए अवसरों का पूरा लाभ दिलाना है।

एसोचैम ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह MoU दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेगा। आने वाले वर्षों में बेहतर कनेक्टिविटी, लोगों के बीच संबंध और हवाई संपर्क को बढ़ावा देकर साझेदारी की पूरी क्षमता हासिल की जा सकेगी।

व्यापार लक्ष्य: 1.3 अरब से बढ़कर 5 अरब डॉलर

वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर तथा सेवाओं का व्यापार 634 मिलियन डॉलर है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में इस व्यापार को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। न्यूजीलैंड में रह रहे लगभग 3 लाख भारतीय इस साझेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

FTA के प्रमुख फायदे

भारत के निर्यात को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा।
व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाना और बाधाओं को कम करना।
पर्यटन, हवाई संपर्क और सेवा क्षेत्र (आईटी, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं) में सहयोग बढ़ाना।

एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि इस समझौते से भारत से टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और मशीनरी का निर्यात बढ़ेगा, जबकि न्यूजीलैंड से कच्चा माल और अन्य जरूरी वस्तुओं का आयात होगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सेवा क्षेत्र खासकर आईटी, वित्तीय सेवाएं, शिक्षा और बिजनेस सेवाएं न्यूजीलैंड में अपनी पहुंच बढ़ाकर बड़ा फायदा उठा सकते हैं।

रणनीतिक महत्व

यह समझौता वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में हो रहे बदलाव के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक विविधता को दर्शाता है। 22 दिसंबर 2025 को सिर्फ नौ महीनों में पूरा हुआ FTA और अब यह MoU दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एसोचैम का मानना है कि दोनों देशों के उद्योग संगठनों के बीच बढ़ता सहयोग व्यापार को आसान बनाएगा और भविष्य के लिए मजबूत, समावेशी तथा टिकाऊ आर्थिक साझेदारी तैयार करेगा। (इनपुट-एजेंसी)