ईवी विस्तार पर ऑटो कंपनियां करेंगी 24,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश, इलेक्ट्रिक कारों की मांग में तेजी: क्रिसिल

भारत में इलेक्ट्रिक कारों को अपनाने की रफ्तार बढ़ने के साथ यात्री वाहन निर्माता कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश की तैयारी कर रही हैं। गुरुवार को जारी क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष के दौरान यात्री वाहन कंपनियों द्वारा प्रस्तावित 60,000 करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में से 24,000 करोड़ रुपए से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विस्तार पर खर्च किए जाने की संभावना है। यह संकेत देता है कि वाहन निर्माता भारतीय कार बाजार में हो रहे संरचनात्मक बदलाव के लिए तेजी से तैयारी कर रहे हैं।

ईवी इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर कंपनियों का फोकस

रिपोर्ट में कहा गया है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और निकट अवधि की लाभप्रदता से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों (ई4डब्ल्यू) को अपनाने की गति तेज हो रही है। कंपनियां अपने उत्पाद पोर्टफोलियो के विस्तार, सप्लाई चेन के स्थानीयकरण और ईवी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश बढ़ा रही हैं। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक आनंद कुलकर्णी ने कहा कि चालू और अगले वित्त वर्ष में अनुमानित 60,000 करोड़ रुपए के कुल कैपेक्स में से 40% से अधिक हिस्सा पोर्टफोलियो विस्तार, सप्लाई चेन स्थानीयकरण और ईवी उत्पादन को बढ़ाने पर खर्च होने का अनुमान है।

मुख्यधारा के बाजार में तेजी से बढ़ रही इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर स्वामित्व लागत, अधिक मॉडल विकल्पों और तकनीकी प्रगति के कारण इलेक्ट्रिक यात्री वाहन अब सीमित बाजार वाले उत्पाद नहीं रह गए हैं और उपभोक्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। मई 2026 तक के तीन महीनों में इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों की औसत मासिक बिक्री लगभग 40% बढ़कर 26,000 यूनिट तक पहुंच गई। इसी अवधि में इनकी बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 के औसत 4.6% से बढ़कर 6.1% हो गई।

अगले वित्त वर्ष तक बिक्री 5 लाख यूनिट पार करने का अनुमान

क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक एवं उप मुख्य रेटिंग अधिकारी मनीष गुप्ता ने कहा कि अल्पकालिक बाधाओं के बावजूद इलेक्ट्रिक कारों की दीर्घकालिक वृद्धि की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सितंबर 2025 में आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाहनों पर जीएसटी में कमी से कुछ समय के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल स्वामित्व लागत (टीसीओ) का लाभ कम हुआ था, जिससे उनकी वृद्धि दर कुछ महीनों के लिए धीमी पड़ी। इसके बावजूद इलेक्ट्रिक कारों की दीर्घकालिक विकास यात्रा प्रभावित नहीं हुई है। गुप्ता के अनुसार, अगले वित्त वर्ष तक इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों की बिक्री पिछले वित्त वर्ष के लगभग 2.2 लाख यूनिट से बढ़कर 5 लाख यूनिट से अधिक हो सकती है। इससे उनकी बाजार हिस्सेदारी 8-10% तक पहुंचने का अनुमान है।

नए मॉडल, बेहतर रेंज और कम लागत से बढ़ेगी मांग

रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं—मॉडलों की संख्या में तेजी से वृद्धि, ड्राइविंग रेंज में सुधार और स्वामित्व लागत में कमी। पिछले दो वित्त वर्षों में इलेक्ट्रिक कार मॉडलों की संख्या दोगुनी होकर करीब 20 हो गई है। अगले वित्त वर्ष तक यह संख्या 35 से अधिक पहुंच सकती है क्योंकि 15 लाख रुपए से कम कीमत वाले सेगमेंट में कई नए मॉडल लॉन्च होने वाले हैं। प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन अब एक बार चार्ज करने पर 500 से 700 किलोमीटर तक की रेंज दे रहे हैं, जबकि मध्यम श्रेणी के मॉडल 300 से 450 किलोमीटर तक चल सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं की ‘रेंज एंग्जायटी’ संबंधी चिंताओं में कमी आई है।

बिक्री बढ़ेगी, लेकिन मुनाफे पर दबाव बना रहेगा

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पाद नवाचार और बड़े पैमाने पर उत्पादन से मिलने वाली दक्षताओं के कारण पिछले दो वित्त वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद लागत 10-15% तक कम हुई है। हालांकि, क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि वाहन निर्माताओं की लाभप्रदता भी तुरंत बढ़ जाएगी। आनंद कुलकर्णी ने कहा कि सीमित उत्पादन पैमाना, शुरुआती स्थिर लागत का दबाव और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण रणनीतियों के कारण निकट अवधि में इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बिक्री बढ़ेगी और परिचालन दक्षता में सुधार होगा, वैसे-वैसे मार्जिन में भी धीरे-धीरे विस्तार देखने को मिलेगा।

चार्जिंग नेटवर्क और नीतिगत समर्थन की होगी अहम भूमिका

रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बनाए रखने के लिए सप्लाई चेन का स्थानीयकरण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और सरकार की नीतिगत सहायता महत्वपूर्ण रहेगी। कम जीएसटी दर और रोड टैक्स में छूट जैसी नीतियां आने वाले वर्षों में ईवी बाजार की वृद्धि को समर्थन देती रहेंगी। (इनपुट: एएनआई)