25/11/25 | 2:02 pm

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अयोध्या: कारसेवकों ने 1992 के संघर्ष को याद कर ध्वजारोहण को संकल्प पूर्ति का क्षण बताया

अयोध्या में होने वाले भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर 1992 के आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में रहे कारसेवक संतोष दुबे इसे “दशकों पुराने संकल्प की सिद्धि” बताते हुए कहा कि यह पल उन सभी कारसेवकों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है जिन्होंने आंदोलन में अपना सर्वस्व झोंक दिया था। उनका कहना है कि जिन संघर्षों, बलिदानों और पीड़ा को उन्होंने और उनके साथियों ने झेला, वह आज मंदिर की पूर्णता देखकर सार्थक प्रतीत हो रहा है।

संतोष दुबे ने 1992 की झड़पों में कारसेवकों पर गोलीबारी, साथियों की शहादत और घायल साथियों को उठाकर ले जाने की बात याद की

1992 की हिंसक झड़पों को याद करते हुए दुबे ने बताया कि कारसेवकों पर गोलियां चली थीं, कई साथी उनके सामने शहीद हुए और वे स्वयं घायल साथियों को कंधे पर उठाकर ले गए। दुबे ने यह भी स्वीकार किया कि ढांचा गिराने के बाद उन्होंने कैमरे और अदालत दोनों में साफ कहा, “मैंने ढांचा तोड़ा है, यह धर्म कार्य था।” उनके अनुसार उस समय का दमन, लाठीचार्ज, गोलियां और गिरफ्तारी आज मंदिर की दिव्यता और ध्वजारोहण की तैयारी के सामने फीके पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह पल उनके जीवन की सार्थकता, तप और तपस्या का प्रतीक है।

दुबे ने कहा, पहले अयोध्या में गोलियां चलती थीं, आज मोदी के नेतृत्व में श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा हो रही है

दुबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक समय अयोध्या में गोली चलाने वाली सरकार थी, और आज वह समय है जब श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा हो रही है। उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर को सप्तकोसी परिक्रमा कर पीएम मोदी को सामूहिक धन्यवाद ज्ञापित किया जाएगा। दुबे के अनुसार, आज जब रामलला के मंदिर पर भव्य ध्वजा फहराने जा रहा है, तब यह आंदोलन से जुड़े हर कारसेवक के लिए आनंद, संतोष और संकल्प-सिद्धि का क्षण है।

बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय कारसेवक रहे रवि शंकर पांडेय का कहना है कि हमारा दशकों पुराना संकल्प आज साकार हो रहा है

बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय कारसेवक रहे रवि शंकर पांडेय का कहना है कि हमारा दशकों पुराना संकल्प आज साकार हो रहा है। आज ध्वजारोहण का ऐतिहासिक कार्यक्रम होने जा रहा है और प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे। हमारे लिए, खासकर हम जीवित कारसेवकों के लिए, यह क्षण अवर्णनीय है। जिस सपने के लिए साथियों ने अपनी जान तक दे दी, किसी का हाथ टूटा, किसी का पैर टूटा, कई साथी शहीद हो गए, आज वह संकल्प पूरा होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर कभी गोलियां चली थीं, जहां हम सबने संघर्ष झेला था, आज वहीं पर भव्य ध्वजारोहण हो रहा है।

आज यहां देश- विदेश से लोग आ रहे हैं, हमारा संघर्ष सफल हुआ, मंदिर का कार्य पूर्णता की ओर है

उन्होंने कहा कि आज यहां देश से ही नहीं, विदेशों से भी लोग आ रहे हैं। पहले जहां एक भी विदेशी नहीं दिखता था, आज 30% विदेशी श्रद्धालु दिख रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि हमारा संघर्ष सफल हुआ। मंदिर पूर्णता की ओर है और हमारा दशकों पुराना संकल्प आज साकार हो रहा है। (इनपुट-आईएएनएस)