केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा है कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में आयुष क्षेत्र निर्णायक भूमिका निभाएगा।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘चिंतन शिविर 2026’ के उद्घाटन के दौरान मंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की बढ़ती अहमियत पर जोर दिया और कहा कि यह क्षेत्र नीति निर्माण और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि आयुष की समग्र (holistic) पद्धति जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने में प्रभावी है और यह “Heal in India, Heal by India” जैसी पहल के अनुरूप है।
मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा बढ़ाए गए बजट से शिक्षा, शोध, इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक स्तर पर आयुष की पहुंच को मजबूती मिल रही है।
इस मौके पर आयुष मंत्रालय के सचिव Vaidya Rajesh Kotecha ने कहा कि चिंतन शिविर क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण मंच है। मंत्रालय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने पर काम कर रहा है।
कार्यक्रम में एक अहम पहल के तहत All India Institute of Ayurveda और General Insurance Council के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज बढ़ेगा और क्लेम प्रक्रिया बेहतर होगी।
मंत्री ने नवाचार, डिजिटलाइजेशन, उद्यमिता और जन-जागरूकता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई, ताकि नीतियों का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंच सके।
कुल मिलाकर, सरकार आयुष को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़कर इसे वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
-(इनपुटःएजेंसी)


