देश में लगभग सार्वभौमिक बैंकिंग कवरेज हासिल कर ली गई है। बैंकों द्वारा जन धन दर्शक (जेडीडी) ऐप पर अपलोड आंकड़ों के अनुसार, 99.92% आबाद गांवों में अब 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध है। 6,01,328 आबाद गांवों में से 6,00,868 गांवों में बैंक शाखा, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) या इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) केंद्र मौजूद है। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में यह जानकारी दी।
1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाओं का नेटवर्क
17 जुलाई 2026 तक देश में बैंकिंग विस्तार को 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाओं, 17.36 लाख बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स और 1.65 लाख आईपीपीबी केंद्रों के मजबूत नेटवर्क का सहयोग मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य सभी आबाद गांवों के 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक शाखा, बीसी या आईपीपीबी के रूप में कम से कम एक बैंकिंग केंद्र उपलब्ध कराना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शाखाएं खोलने को प्रोत्साहन
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पूर्व अनुमति के बिना देश में कहीं भी बैंक शाखाएं खोलने की अनुमति दी है। इसके लिए शर्त है कि उनकी 25% शाखाएं बैंकिंग सुविधाओं से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में हों।
बैंकिंग आउटलेट खोलना सतत प्रक्रिया
आरबीआई के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकिंग सुविधा से वंचित क्षेत्रों में बैंकिंग आउटलेट खोलना लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है। इसकी निगरानी राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) या केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समिति (यूटीएलबीसी) संबंधित सरकार, सदस्य बैंकों और अन्य हितधारकों के परामर्श से करती है। बैंक आरबीआई के निर्देशों, अपनी व्यावसायिक योजनाओं और आर्थिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए नए बैंकिंग आउटलेट खोलने के प्रस्तावों पर विचार करते हैं।
पीएमजेडीवाई के 58.77 करोड़ खाते
17 जुलाई 2026 तक देश में प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) के कुल 58.77 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में कुल 3,12,414 करोड़ रुपए की राशि जमा है। इससे वित्तीय समावेशन के विस्तार और बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ने का संकेत मिलता है।
कृषि ऋण के लिए डिजिटल व्यवस्था मजबूत
कृषि ऋण वितरण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई डिजिटल पहल शुरू की हैं। जन समर्थ पोर्टल को सरकारी ऋण और सब्सिडी योजनाओं को एक मंच पर उपलब्ध कराने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इसके जरिए ऋण आवेदन और आवेदक के डिजिटल डेटा के आकलन के आधार पर समय पर ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।
ई-केवाईसी और किसान ऋण पोर्टल से प्रक्रिया आसान
कृषि ऋण वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए नाबार्ड का ई-केवाईसी एप्लिकेशन, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का कृषिका और बैंकों के अन्य डिजिटल एप्लिकेशन इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनसे लाभार्थियों की पहचान, संपर्क, ऋण आवेदन के प्रसंस्करण और निगरानी में मदद मिलती है। सितंबर 2023 में शुरू किया गया किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) आधार आधारित लाभार्थी सत्यापन और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिए लिए गए ऋणों के लिए संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना (एमआईएसएस) के तहत डिजिटल दावों के तेजी से निपटारे में मदद करता है।
डिजिटल भुगतान की साइबर सुरक्षा पर जोर
सरकार और आरबीआई डिजिटल भुगतान लेनदेन की साइबर सुरक्षा मजबूत करने तथा नागरिकों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं। सरकार ने आरबीआई के परामर्श से इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (आईडीपीआईसी) की स्थापना की है। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ वास्तविक समय में धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी और अलर्ट साझा करना है।
डिजिटल भुगतान के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानक
आरबीआई ने वेब और मोबाइल ऐप से जुड़े खतरों से निपटने के लिए फरवरी 2021 में डिजिटल भुगतान सुरक्षा नियंत्रणों पर मास्टर दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनके तहत बैंकों के लिए इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग और कार्ड भुगतान समेत विभिन्न भुगतान माध्यमों में सुरक्षा नियंत्रणों का समान न्यूनतम मानक लागू करना अनिवार्य है।
‘म्यूलहंटर’ से संदिग्ध खातों की पहचान
आरबीआई ने मनी म्यूल की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘म्यूलहंटर’ टूल विकसित किया है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इसका इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, ताकि धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध खातों और लेनदेन की पहचान बेहतर तरीके से की जा सके।
साइबर अपराध की रिपोर्टिंग के लिए पोर्टल और हेल्पलाइन
गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) डिजिटल ऋण देने वाले ऐप्स का सक्रिय रूप से विश्लेषण कर रहा है। नागरिकों को फर्जी या अवैध ऋण ऐप समेत साइबर घटनाओं की रिपोर्ट करने की सुविधा देने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 उपलब्ध कराई गई है।
जागरूकता अभियानों से साइबर धोखाधड़ी रोकने का प्रयास
आरबीआई और बैंक साइबर अपराध की रोकथाम के लिए एसएमएस, रेडियो अभियानों और अन्य प्रचार माध्यमों से जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इसके अलावा, आरबीआई धोखाधड़ी और जोखिम कम करने के उपायों पर केंद्रित इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग जागरूकता एवं प्रशिक्षण (ई-बीएएटी) कार्यक्रम भी आयोजित करता है। (इनपुट: पीआईबी)


