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बिहार ने 30.21 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा: केंद्र

भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी (2021 के आंकड़े) ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जिससे ग्रामीण विकास सरकार के नीतिगत एजेंडे में एक स्वाभाविक प्राथमिकता बन गया है। पिछले 11 वर्षों में, निरंतर प्रयासों ने गांवों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार, समावेशी और समान विकास को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया है कि ग्रामीण भारत राष्ट्र की विकास यात्रा का केंद्र बना रहे।

केंद्र सरकार देश में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आज, बात करते हैं, बिहार राज्य की, केंद्र सरकार की योजनाएं बिहार के सुदूर इलाकों तक भी बिना किसी देरी के पहुंच रही हैं। केंद्र सरकार ने डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2024-25 तक बिहार को ₹6,181.41 करोड़ की पर्याप्त राशि आवंटित की है। इस महत्वपूर्ण निवेश का उद्देश्य गरीब परिवारों को लाभकारी स्व-रोज़गार और कुशल वेतन रोजगार के अवसर प्रदान करके गरीबी कम करना है। बिहार ने 30.21 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। वहीं, जुलाई 2025 तक, राज्य में 20 लाख से अधिक महिलाएं पहले ही यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं, जो चल रही महिला सशक्तिकरण पहलों की सफलता को दर्शाता है।

राष्ट्रीय पहलों के माध्यम से ग्रामीण बिहार को मज़बूत बनाना

दरअसल, पहले, ग्रामीण लोग अपनी आय का 50% से ज्यादा हिस्सा भोजन और जरूरी चीजों पर खर्च करते थे। आजादी के बाद पहली बार, ग्रामीण क्षेत्रों में भोजन पर होने वाला खर्च 50% से नीचे आया है, जो बढ़ती गैर जरूरी आय और बेहतर क्रय शक्ति को दर्शाता है।

आजीविका

बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ- 2 सितंबर, 2025 को प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड का उद्घाटन किया और संस्था के खाते में ₹105 करोड़ हस्तांतरित किए। सहकारी संघ का उद्देश्य जीविका से जुड़े समुदाय के सदस्यों को समय पर और किफायती ऋण उपलब्ध कराना है। सभी पंजीकृत क्लस्टर-स्तरीय संघ इस सहकारी समिति का हिस्सा होंगे, जिसे केंद्र और राज्य द्वारा संयुक्त रूप से समर्थन दिया जाएगा। पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली, जीविका दीदियों को सीधे और पारदर्शी धन हस्तांतरण सुनिश्चित करेगी, जिसकी सुविधा टैबलेट से लैस 12,000 सामुदायिक कार्यकर्ताओं द्वारा दी जाएगी।

इस पहल से ग्रामीण महिला उद्यमिता को मजबूत करने और समुदाय-आधारित उद्यमों का विस्तार होने की उम्मीद है। शुभारंभ समारोह में लगभग 20 लाख महिलाओं की भागीदारी ने कार्यक्रम के व्यापक प्रभाव को दर्शाया।

बिहार में बुनियादी ढांचा विकास

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) – सितंबर 2024 तक बिहार में ₹28,292 करोड़ की लागत से 53,419 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें और 1,153 पुल बनाए जा चुके हैं, साथ ही ₹5,229 करोड़ की लागत से 6,285 किलोमीटर अतिरिक्त सड़कें और 194 पुलों का उन्नयन कार्य चल रहा है

22 अगस्त, 2025 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के गया में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के बख्तियारपुर से मोकामा तक चार लेन वाले खंड का उद्घाटन किया, जिस पर लगभग ₹1,900 करोड़ की लागत आई है, जिससे भीड़भाड़ कम होगी, यात्रा का समय कम होगा और यात्री एवं माल ढुलाई में वृद्धि होगी। इसके अलावा, बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-120 के बिक्रमगंज-दावथ-नवानगर-डुमरांव खंड के पक्के शोल्डर सहित दो लेन में सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क में सुधार होगा, जिससे स्थानीय आबादी के लिए नए आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।

सौभाग्य योजना-बिहार में नवंबर 2018 में सौभाग्य के तहत घरेलू विद्युतीकरण का स्तर 100% तक पहुंच गया है।

भारतनेट परियोजना-बिहार में, भारतनेट चरण- I और चरण- II के तहत नियोजित 8,340 ग्राम पंचायतों को अगस्त 2025 तक सेवा के लिए तैयार कर दिया गया है।

राज्य में आवास एवं स्वच्छता

प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण (पीएमएवाई-जी)-पीएमएवाई-जी के अंतर्गत ग्रामीण बिहार में 50.12 लाख से अधिक पक्के मकान बनाने का संचयी लक्ष्य है, जिसमें से 49 लाख से अधिक मकान पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं और 4 अगस्त, 2025 तक 38.39 लाख से अधिक मकान पूरे हो चुके हैं।

18 जुलाई, 2025 को बिहार के मोतिहारी में, प्रधानमंत्री मोदी ने गृह प्रवेश समारोह के तहत 12,000 लाभार्थियों को मकान की चाबियां सौंपीं और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 40,000 लाभार्थियों को ₹160 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की।

22 अगस्त, 2025 को बिहार के गया में, प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के अंतर्गत 12,000 लाभार्थियों को गृह प्रवेश समारोह के तहत प्रतीकात्मक रूप से घर की चाबियां सौंपीं।

स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण)-बिहार में, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) के अंतर्गत 2014 से जुलाई 2025 तक 1.39 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (आईएचएचएल) और 9364 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) का निर्माण किया गया है।

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) – वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, 07 अगस्त, 2025 तक बिहार के 73.88 लाख से अधिक पात्र लाभार्थियों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) –इस योजना के तहत ₹548.13 करोड़ के निवेश से 38 अनूठी पहलों के माध्यम से बिहार का मत्स्य पालन क्षेत्र उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है।

राज्य में मत्स्य पालन और जलीय कृषि परियोजनाओं का शुभारंभ

18 जुलाई, 2025 को, बिहार के मोतिहारी में, प्रधानमंत्री ने पीएमएमएसवाई के तहत मत्स्य पालन और जलीय कृषि परियोजनाओं का शुभारंभ किया, जिसमें नई मछली हैचरी, बायोफ्लोक इकाइयां, सजावटी मछली पालन, एकीकृत जलीय कृषि इकाइयां और मछली चारा मिलें शामिल हैं ताकि बिहार में रोजगार, मछली उत्पादन और ग्रामीण विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

पीएम-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई)– जुलाई 2025 तक, इस योजना की शुरुआत से लेकर अब तक, पीएम-आरकेवीवाई के मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता घटक के अंतर्गत बिहार के किसानों को 1.54 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई)-पीएमकेएसवाई के अंतर्गत, 30 जून, 2025 तक, बिहार के लिए ₹748.76 करोड़ के परिव्यय वाली कुल 15 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस योजना से राज्य के 28,000 से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं।

मखाना बोर्ड की स्थापना

बिहार में मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक मखाना बोर्ड की स्थापना की जा रही है। इन गतिविधियों में लगे किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) में संगठित किया जाएगा। बोर्ड मखाना उत्पादकों को सहायता और प्रशिक्षण सहायता भी प्रदान करेगा, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि उन्हें सभी संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।

एफपीओ की स्थापना

इस उपलब्धि को चिह्नित करते हुए, बिहार में फरवरी, 2025 को पीएम मोदी द्वारा 10,000वें एफपीओ की स्थापना की गई। 10,000वां एफपीओ खगड़िया जिले में पंजीकृत किया गया है और यह मक्का, केला और धान पर केंद्रित है। पश्चिमी कोशी नहर ईआरएम परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में 50,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती करने वाले बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलेगा।

पेयजल और स्वच्छ ऊर्जा

जल जीवन मिशन (जेजेएम) – 07 अगस्त, 2025 तक, बिहार में 1.57 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को जेजेएम के तहत नल के पानी के कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) – 01 अप्रैल, 2025 तक, पीएमयूवाई के तहत बिहार में ग्रामीण महिलाओं को 1.16 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं।

स्वास्थ्य-राज्य में 4 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई)-पीएम-जेएवाई के तहत, बिहार ने सभी पात्र परिवारों का 100% कवरेज हासिल कर लिया है। सितंबर 2025 तक, राज्य में 4 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इससे केवल एक वर्ष में ही बिहार के लोगों के स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च में ₹1,000 करोड़ से ज्यादा की बचत हुई है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम)- एबीडीएम के कार्यान्वयन में भी बिहार ने नंबर 1 रैंक हासिल की है।
13 नवंबर, 2024 को, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के दरभंगा में एम्स दरभंगा की आधारशिला रखी।

बिहार का ग्रामीण विकास परिदृश्य बदल गया है

केंद्र सरकार के निरंतर ध्यान दिए जाने से बिहार का ग्रामीण विकास परिदृश्य बदल गया है। बुनियादी ढांचे, आवास एवं स्वच्छता, कृषि और मत्स्य पालन से लेकर आजीविका, स्वास्थ्य सेवा और स्वच्छ ऊर्जा तक, इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।

उल्लेखनीय है, प्रमुख योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ रहे हैं और बुनियादी सुविधाएं हर घर तक पहुंच रही हैं। विकसित बिहार और उसके माध्यम से विकसित भारत का सपना अब वास्तविकता के करीब पहुंच रहा है।