विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने हैदराबाद की के. एन. बायोसाइंसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को स्पाइरुलिना से C-Phycocyanin के व्यावसायिक उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।
इस परियोजना का उद्देश्य भारत में विकसित स्वदेशी तकनीक के जरिए प्राकृतिक नीले रंग (Natural Blue Pigment) C-Phycocyanin का उत्पादन करना है, जिससे आयातित प्राकृतिक रंगों पर निर्भरता कम होगी।
IIT गुवाहाटी ने विकसित की तकनीक
इस तकनीक को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी ने स्वदेशी स्पाइरुलिना (NCIM 5143) प्रजाति का उपयोग करके विकसित किया है। तकनीक का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए इसे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) समझौते के तहत कंपनी को सौंपा गया है।
यह परियोजना सार्वजनिक अनुसंधान को उद्योग तक पहुंचाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
कई उद्योगों में होगा उपयोग
प्राकृतिक ब्लू पिगमेंट C-Phycocyanin का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:
- खाद्य उद्योग
- न्यूट्रास्यूटिकल्स (स्वास्थ्य उत्पाद)
- कृषि
- मत्स्य पालन
- पोल्ट्री फीड
- बायो-स्टिमुलेंट्स
वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक और केमिकल-मुक्त खाद्य सामग्री की बढ़ती मांग को देखते हुए इस उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है।
पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन तकनीक
नई तकनीक में स्पाइरुलिना की नियंत्रित परिस्थितियों में खेती की जाती है। इसके बाद बिना रासायनिक सॉल्वेंट के पर्यावरण अनुकूल प्रक्रिया से उच्च गुणवत्ता वाला C-Phycocyanin निकाला और शुद्ध किया जाता है।
इस तकनीक से कम रसायनों का उपयोग होता है और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुरूप शुद्ध उत्पाद तैयार किया जा सकता है।
भारत में बनेगी नई बायोटेक वैल्यू चेन
परियोजना के तहत भारत में पहली बार बड़े स्तर पर C-Phycocyanin उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी। इससे प्राकृतिक पिगमेंट और विशेष जैव-उत्पादों की घरेलू वैल्यू चेन मजबूत होगी।
इसके साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी, बायोटेक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी।
TDB ने जताया भरोसा
TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी में अपार संभावनाएं हैं। ऐसी स्वदेशी तकनीकों को बाजार तक पहुंचाकर न केवल हरित विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर जैव-आधारित अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान भी बना सकेगा।
वहीं, के. एन. बायोसाइंसेज ने कहा कि TDB की सहायता से कंपनी बड़े स्तर पर उत्पादन इकाई स्थापित करेगी और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी C-Phycocyanin की आपूर्ति कर सकेगी।
-PIB


