हाल ही में शुरू किए गए बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) के तीसरे चरण (Phase-III) से देश में क्षेत्रीय असमानता को कम करने और महिला वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी। यह जानकारी केंद्र सरकार ने गुरुवार को दी।
इस कार्यक्रम का तीसरा चरण वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगा, जबकि इसकी विस्तारित सेवा अवधि 2037-38 तक होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में इसके कार्यान्वयन को मंज़ूरी दी है।
सरकारी बयान के अनुसार, “BRCP Phase-III का उद्देश्य क्षेत्रीय असमानता को दूर करना और विशेष रूप से महिला वैज्ञानिकों के लिए समावेशिता को बढ़ावा देना है।”
यह कार्यक्रम वैज्ञानिकों को उनके करियर के विभिन्न चरणों में फेलोशिप और सहयोगी अनुदान (Collaborative Grants) के माध्यम से सहायता प्रदान करेगा, ताकि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख चुनौतियों पर उच्च गुणवत्ता वाला और नैतिक अनुसंधान हो सके।
तीसरे चरण के तहत कुल 1,500 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की ओर से 1,000 करोड़ रुपये और ब्रिटेन की वेलकम ट्रस्ट की ओर से 500 करोड़ रुपये का योगदान होगा।
यह चरण भारत में बायोमेडिकल उत्कृष्टता के लिए नए मानक स्थापित करेगा। कार्यक्रम के तहत 2,000 से अधिक छात्रों और पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोज़ को प्रशिक्षण दिया जाएगा, उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशन तैयार होंगे, पेटेंट योग्य खोजें विकसित होंगी, और लगभग 25–30 प्रतिशत सहयोगी परियोजनाएँ तकनीकी तत्परता स्तर (Technology Readiness Level-4) तक पहुँचेंगी।
इसके साथ ही, महिला वैज्ञानिकों के लिए 10–15 प्रतिशत अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया जाएगा, ताकि भारत के अनुसंधान क्षेत्र में अधिक समावेशिता सुनिश्चित की जा सके।
यह पहल विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय दृष्टि से जुड़ी हुई है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक बायोमेडिकल नवाचार और ट्रांसलेशनल रिसर्च का केंद्र बनाना है।
BRCP के माध्यम से देश में शीर्ष वैज्ञानिक प्रतिभा को पोषित किया जाएगा, अंतःविषयक (interdisciplinary) और ट्रांसलेशनल रिसर्च को प्रोत्साहन मिलेगा, तथा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूती मिलेगी।
भारत में बायोमेडिकल अनुसंधान ने पहले भी कम लागत वाले CRISPR आधारित डायग्नोस्टिक किट, डेंगू रैपिड टेस्ट, और निमोनिया, खसरा-रुबेला तथा कोविड-19 के स्वदेशी टीके विकसित कर चिकित्सा क्षेत्र को अधिक सुलभ और आत्मनिर्भर बनाया है।
सरकार ने कहा कि “ये प्रयास भारत को बायोमेडिकल नवाचार में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं।”


