सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने “भारत में कोयले के मौद्रिक परिसंपत्ति खातों के संकलन के लिए कार्यप्रणालीगत दृष्टिकोण” शीर्षक से एक चर्चा पत्र जारी किया है। यह दस्तावेज़ संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (एसईईए) केंद्रीय ढांचे के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग ने अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक के रूप में मान्यता प्रदान की है।
पर्यावरणीय लेखांकन को मजबूत करने की पहल
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय वर्ष 2018 से एसईईए फ्रेमवर्क का अनुसरण करते हुए ‘एन्विस्टैट्स इंडिया’ और ‘एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया’ के माध्यम से कोयले तथा अन्य खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के भौतिक परिसंपत्ति खातों का संकलन कर रहा है। अब मंत्रालय ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के प्रायोगिक मौद्रिक मूल्यांकन और मौद्रिक परिसंपत्ति खातों के संकलन की शुरुआत की है।
प्राकृतिक संसाधनों के आर्थिक मूल्य का आकलन
पर्यावरणीय संपत्तियों का मौद्रिक मूल्यांकन प्राकृतिक संसाधनों में निहित आर्थिक मूल्य का आकलन करने में मदद करता है। इससे संसाधनों के क्षरण की लागत का अनुमान लगाया जा सकता है, भविष्य में संसाधन निष्कर्षण से होने वाले सरकारी राजस्व का आकलन संभव होता है और विभिन्न पर्यावरणीय संपत्तियों के बीच तुलनात्मक अध्ययन को भी सुविधा मिलती है। राष्ट्रीय खनिज नीति 2019 में सतत खनन को अनिवार्य बनाए जाने के कारण यह पहल नीति निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तीन अंतरराष्ट्रीय पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन
चर्चा पत्र में गैर-नवीकरणीय खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के मौद्रिक मूल्यांकन के लिए विस्तृत वैचारिक ढांचा प्रस्तुत किया गया है। इसमें आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी-2025), विश्व बैंक की ‘चेंजिंग वेल्थ ऑफ नेशंस’ (2024) और फिलीपींस आधारित पद्धति (2024) सहित तीन अंतरराष्ट्रीय मॉडल का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। साथ ही भारतीय परिस्थितियों में इनके उपयोग, डेटा आवश्यकताओं और संभावित स्रोतों का भी मूल्यांकन किया गया है।
कोयले को उदाहरण के रूप में चुना गया
भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए इसे अध्ययन के लिए आधार बनाया गया है। कोयला देश का सबसे बड़ा घरेलू ऊर्जा स्रोत है और बिजली उत्पादन के साथ-साथ इस्पात, सीमेंट तथा रसायन उद्योगों की जरूरतों को पूरा करता है। वर्ष 2024-25 में भारत ने 1,047.523 मिलियन टन कच्चे कोयले और 45.133 मिलियन टन लिग्नाइट का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया, जो ऊर्जा क्षेत्र में इसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
ओईसीडी पद्धति को सबसे उपयुक्त माना गया
अध्ययन में शामिल तीनों पद्धतियों में से ओईसीडी (2025) मॉडल को भारतीय संदर्भ के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया है। मंत्रालय के अनुसार यह पद्धति एसईईए केंद्रीय ढांचे और राष्ट्रीय लेखा प्रणाली पर आधारित होने के साथ-साथ भारत के मौजूदा सांख्यिकीय एवं डेटा ढांचे में आसानी से लागू की जा सकती है। इसमें भविष्य के संसाधन किराए का आकलन करने के लिए शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाता है।
सुझाव और प्रतिक्रियाएं आमंत्रित
मंत्रालय ने इस चर्चा पत्र पर विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं आमंत्रित की हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर गैर-नवीकरणीय खनिज संसाधनों के मौद्रिक मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत राष्ट्रीय पद्धति तैयार की जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि इससे प्राकृतिक पूंजी लेखांकन के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका मिल सकती है तथा डेटा-आधारित नीति निर्माण और सतत विकास को मजबूती मिलेगी।
मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है दस्तावेज़
इच्छुक व्यक्ति अपनी प्रतिक्रियाएं सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग की पर्यावरण इकाई को (ssd-mospi@gov.in) भेज सकते हैं। चर्चा पत्र मंत्रालय की वेबसाइट (www.mospi.gov.in) पर भी उपलब्ध कराया गया है। (इनपुट: पीआईबी)


