केंद्र सरकार ने 11 करोड़ से अधिक किसानों को 3.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि वितरित की

पीएम-किसान योजना का लाभ देश भर के सभी किसानों तक बिना किसी बिचौलियों की भागीदारी के पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक 17 किस्तों में 11 करोड़ से अधिक किसानों को 3.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि किसान-केंद्रित डिजिटल बुनियादी ढांचे ने यह सुनिश्चित किया है कि इस योजना का लाभ देश भर के सभी किसानों तक बिना किसी बिचौलियों की भागीदारी के पहुंचे। लाभार्थियों के पंजीकरण और सत्यापन में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखते हुए, भारत सरकार ने अब तक 17 किस्तों में 11 करोड़ से अधिक किसानों को 3.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है।

दरअसल पीएम-किसान योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2019 में भूमि-धारक किसानों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए शुरू किया था। इस योजना के तहत, तीन समान किस्तों में प्रति वर्ष 6,000 रुपये का वित्तीय लाभ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) मोड के माध्यम से देश भर के किसान परिवारों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता है। पीएम-किसान योजना दुनिया की सबसे बड़ी डीबीटी योजनाओं में से एक है।

बता दें, केंद्र सरकार राज्य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के विचारों पर विचार करने के बाद कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर 22 अनिवार्य कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करती है। एमएसपी की सिफारिश करते समय, सीएसीपी समग्र मांग-आपूर्ति की स्थिति, उत्पादन की लागत, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतें, अंतर फसल मूल्य समता, कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों के बीच व्यापार की शर्तें, बाकी अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण कारकों पर विचार करता है, साथ ही भूमि, पानी और अन्य उत्पादन संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग और उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50 प्रतिशत मार्जिन सुनिश्चित करता है।

एमएसपी नीति के उद्देश्यों को साकार करने के लिए, सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य एजेंसियों के माध्यम से धान और गेहूं के लिए मूल्य समर्थन प्रदान करती है। भारत सरकार ने धान एवं गेहूं की खरीद के लिए खरीद करने वाले राज्यों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं क्योंकि किसानों से खाद्यान्न की खरीद मुख्य रूप से राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा की जाती है। समझौता ज्ञापन में विशेष रूप से जोर दिया गया है कि एमएसपी और बोनस का भुगतान, यदि कोई हो, सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा धान/गेहूं की खरीद के 48 घंटे के भीतर केवल ऑनलाइन खरीद प्रणाली के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाना है।

किसानों से खाद्यान्न की पूरी खरीद ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाती है और एमएसपी का ऑनलाइन भुगतान भी सीधे किसानों के खाते में किया जाता है। इसके अतिरिक्त, उचित औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) के तिलहन, दलहन और खोपरा को पीएमएएएसएचए की अम्ब्रेला योजना के तहत मूल्य समर्थन योजना के तहत पंजीकृत किसानों से, इसके दिशा-निर्देशों के अनुसार, संबंधित राज्य सरकारों के परामर्श से एमएसपी पर खरीदा जाता है।

इसके अतिरिक्त सरकार कपास और जूट की खरीद भी क्रमशः भारतीय कपास निगम (CCI) और भारतीय जूट निगम (JCI) के माध्यम से एमएसपी (MSP) पर करती है। सीसीआई (CCI) ने वास्तविक कपास किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें मौके पर ही आधार-आधारित किसान पंजीकरण का कार्यान्वयन, “कॉट-एली” मोबाइल ऐप लॉन्च करना और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन गृह (NACH) के माध्यम से कपास किसानों को 100% भुगतान सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में करना शामिल है। आम तौर पर, किसानों को 7 दिनों के भीतर भुगतान किया जाता है।

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