केंद्र सरकार का 1 लाख करोड़ रुपये का आरडीआई फंड निजी क्षेत्र में इनोवेशन को देगा बढ़ावा : जितेंद्र सिंह

केंद्र सरकार द्वारा शनिवार को शुरू किया गया 1 लाख करोड़ रुपये का रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड भारत को एक वैश्विक इनोवेशन हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पंचकूला में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 में कहा कि यह फंड निजी क्षेत्र को शोध और तकनीक विकास में अधिक सक्रिय करेगा, जिससे भारत की नवाचार क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

डॉ. सिंह ने उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, निवेशकों और शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे भारत के नवाचार मिशन में अधिक भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि विज्ञान नीति का प्रभाव केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वास्तविक जीवन के परिणामों में दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सार्वजनिक संस्थान नवाचार का पूरा बोझ नहीं उठा सकते और भारत के फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज में आगे बढ़ने के लिए निजी क्षेत्र की मजबूत भागीदारी आवश्यक है।

कार्यक्रम में आरडीआई फंड की संरचना और संचालन मॉडल का विस्तार से किया गया। यह फंड इस वर्ष मंजूर किया गया था और नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च किया गया। इस फंड का लक्ष्य निजी क्षेत्र द्वारा संचालित R&D को बढ़ावा देना है, और यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, डीप-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इकॉनमी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह फंड कंपनियों को डायरेक्ट ग्रांट्स नहीं देगा। यह मल्टी-टियर सिस्टम पर काम करेगा, जिसमें ANRF (अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) मुख्य प्रबंधक होगा। फंड का वितरण वैकल्पिक निवेश फंड, विकास वित्त संस्थान और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड तथा BIRAC (बायोरैक) जैसी विशेष एजेंसियों के माध्यम से किया जाएगा। सहायता मुख्य रूप से कम-ब्याज वाले दीर्घकालिक ऋण या इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स के रूप में दी जाएगी।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में शोध कार्य, पेटेंट फाइलिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचने में अभी भी बड़ी खाई है। RDI Fund इसी चुनौती को दूर करने के लिए बनाया गया है ताकि प्रयोगशाला की तकनीकें वास्तविक उत्पाद और सेवाओं में बदली जा सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल टेक्नोलॉजिकल सेल्फ रिलायंस) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और ANRF द्वारा बुनियादी शोध, युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन और उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों को आगे बढ़ाता है।

केंद्रीय मंत्री ने प्रतिभागियों से इस योजना के संचालन पर सुझाव मांगे और कहा कि जरूरत के अनुसार मॉडल में सुधार किए जाएंगे। उन्होंने इसे “राष्ट्रीय साझेदारी परियोजना” बताते हुए उद्योगों से लंबे समय के शोध निवेश के लिए ऐम्बिशन एंड रिस्क एपेटाइट के साथ आगे आने का आग्रह किया। अधिकारियों ने कहा कि विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए यह फंड भारत को आयातित तकनीक निर्माताओं से आगे बढ़कर स्वदेशी तकनीक निर्यात करने वाली अर्थव्यवस्था में बदलने में मदद करेगा।-(PIB)

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