महाराष्ट्र में प्रशासनिक अधिकारों के केंद्रीकरण की दिशा में बड़ा बदलाव हुआ है। महाराष्ट्र सरकार ने ‘महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस, 2026’ अधिसूचित किए हैं, जिसके तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को व्यापक जनहित में किसी भी कैबिनेट मंत्री के फैसले में बदलाव, संशोधन या उसे रद्द करने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, अर्ध-न्यायिक मामलों को इस अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है।
पुराने नियमों की जगह नया प्रशासनिक ढांचा
सामान्य प्रशासन विभाग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 166(2) और 166(3) के तहत नए नियमों को राजपत्र में प्रकाशित किया है। इसके साथ ही राज्य में कार्यपालिका के निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े पुराने नियमों और प्रक्रियाओं का स्थान नए नियमों ने ले लिया है। नियमों में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, मुख्य सचिव और विभागीय सचिवों की प्रशासनिक शक्तियों और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया गया है।
जनहित में मंत्री का फैसला बदल सकेंगे सीएम
नियम 13(5) के तहत मुख्यमंत्री को सार्वजनिक हित में विभागीय मंत्रियों द्वारा लिए गए निर्णयों को बदलने, संशोधित करने या रद्द करने का स्पष्ट अधिकार दिया गया है। हालांकि, किसी मंत्री के फैसले को पलटने पर मुख्यमंत्री को इसके विस्तृत कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे।
किसी भी विभाग की फाइल मंगा सकेंगे
नए प्रावधानों के तहत मुख्यमंत्री किसी भी समय किसी भी विभाग से आधिकारिक दस्तावेज, फाइलें या अभिलेख मंगा सकते हैं। संबंधित मंत्री और विभागीय सचिव इन निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे। हालांकि, विभाग के नियमित प्रशासनिक कार्य और उसकी प्राथमिक जिम्मेदारियां संबंधित प्रभारी मंत्री के पास ही रहेंगी।
डिजिटल फाइलें भी ‘मामले’ की परिभाषा में
नियम 2(सी) में ‘मामले’ की औपचारिक परिभाषा दी गई है। इसमें राज्य के ई-ऑफिस सिस्टम के तहत संसाधित डिजिटल नोट्स, ई-दस्तावेज और डिजिटल फाइलें भी शामिल हैं। इससे डिजिटल माध्यम से संचालित प्रशासनिक निर्णय भी नए नियमों के दायरे में आ गए हैं।
वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी
नियम 17(2) और नियम 39 के तहत कोई भी प्रशासनिक विभाग वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना राजस्व परित्याग, भूमि अनुदान, रियायत या अनिर्धारित व्यय जैसे वित्तीय प्रभाव वाले आदेश जारी नहीं कर सकेगा।
मुख्य सचिव की भूमिका भी स्पष्ट
मुख्य सचिव राज्य में सिविल सेवाओं के प्रमुख और मंत्रिमंडल के सचिव के रूप में कार्य करेंगे। नियम 16(1) के तहत मुख्य सचिव मुख्यमंत्री या मंत्रियों को यह सूचित कर सकते हैं कि कोई प्रस्तावित कार्रवाई कानून, वैधानिक प्रावधानों या स्थापित नीति का उल्लंघन करती है।
दूसरे विभागों से परामर्श अनिवार्य
नए नियमों के तहत विभागों को निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों से आवश्यक परामर्श करना होगा। भारत सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार से जुड़े संभावित विवाद या मतभेद की जानकारी मुख्यमंत्री और राज्यपाल को तत्काल देनी होगी।
अधिकृत समितियां ले सकेंगी फैसले
अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव की अध्यक्षता में अधिकृत समितियों का गठन कर सकती है। इन समितियों को निर्धारित विषयों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया जा सकेगा।
14 अगस्त से तत्काल प्रभाव से लागू
नए नियम 14 अगस्त 2026 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होते ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गए। अधिकारियों के मुताबिक, इससे राज्य सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया और प्रशासनिक अधिकारों का ढांचा अधिक स्पष्ट होगा।
महायुति में गठबंधन की राजनीति पर नजर
अधिसूचना के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि नए अधिकारों का सत्तारूढ़ महायुति सरकार की आंतरिक गतिशीलता पर क्या असर पड़ेगा। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) समेत प्रमुख गठबंधन सहयोगियों के बीच है।
सहयोगी दलों के मंत्रियों के फैसलों पर असर की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री फडणवीस इस अधिकार का इस्तेमाल सहयोगी दलों के मंत्रियों द्वारा लिए गए फैसलों को बदलने या रद्द करने के लिए करते हैं, तो इससे महायुति के भीतर राजनीतिक मतभेद या बहस पैदा हो सकती है। ऐसे में नए नियमों के तहत मुख्यमंत्री को मिली शक्तियों का इस्तेमाल गठबंधन की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (इनपुट: आईएएनएस)


