केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कृषि भवन, नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के बाढ़ व भूस्खलन प्रभावित किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 21वीं किस्त अग्रिम जारी की। जारी किस्त के तहत लगभग 8.55 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 171 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए, जिनमें 85,418 महिला किसान शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर के किसानों को पीएम-किसान के तहत अब तक कुल 4,052 करोड़ रु. की सहायता दी जा चुकी है।
इस दौरान, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर सरकार से लगभग 5100 घरों के क्षतिग्रस्त होने संबधी जानकारी ज्ञापन के माध्यम से मिली है, जिनके पुनर्निर्माण के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 85.62 करोड़ रु. का विशेष प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया है, जिसमें मूल सहायता राशि के अलावा शौचालय निर्माण व मनरेगा से भी राशि मिलेगी, ताकि लोग अपना घर फिर से बना सकें।
साथ ही, राज्य से प्रस्ताव प्राप्त होने पर ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा मनरेगा के तहत 100 दिनों के बजाय 150 दिनों की मजदूरी दी जाएगी, जिससे कि प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त आजीविका सहायता मिलेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बाढ़ और अन्य आपदा से प्रभावित जम्मू-कश्मीर के किसानों के साथ केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई है, हम सभी प्रभावित किसानों व अन्य लोगों को संकट से पार निकालेंगे, इसी कड़ी में एक कदम पीएम-किसान की किस्त की यह राशि बड़ी राहत है, जिससे किसान अपने आवश्यक कार्य कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि हम किसी भी किसान को संकट की इस घड़ी में अकेला नहीं छोड़ेंगे। केंद्र सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं व सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से हरसंभव मदद दे रही है, आगे भी जो प्रावधान है, उनके अनुरूप प्रभावित निवासियों को सहायता की जाएगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि खेती-बाड़ी फिर शुरू करने के लिए बीज, खाद व अन्य जरूरतें पूरी करने केंद्र सरकार पूरी तरह तत्पर हैं। जिसका खेत-उसकी रेत की नीति के तहत राज्य सरकार ने रेत बेचने के लिए अनुमति दे दी है, वहीं राज्य से प्रस्ताव मिलने पर एनडीआरएफ के तहत भी जरूरत होने पर राशि देने का प्रावधान हैं।
शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत भी राज्य का प्रस्ताव मिलने पर राशि पीड़ित किसानों को उनके खाते में देने की व्यवस्था केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से की जाएगी। (इनपुट-पीआईबी)


