केंद्र राष्ट्रीय Agri‑AI अनुसंधान नेटवर्क और डेटा कॉमन्स ढांचा बनाएगा: जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुंबई में आयोजित AI4Agri 2026 शिखर सम्मेलन में कहा की भारत की अगली कृषि क्रांति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से संचालित होगी। उन्होंने एआई (AI) को खेती नीति, अनुसंधान और निवेश ढांचे का केंद्रीय स्तंभ बताया।

कल रविवार को “ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन AI इन एग्रीकल्चर एंड इन्वेस्टर समिट 2026” के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि AI उन संरचनात्मक चुनौतियों के लिए पहली बार बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधान प्रस्तुत करता है जो लंबे समय से खेती उत्पादकता को सीमित कर रही हैं–अनियमित मौसम, जानकारी की असमानता और टुकड़े‑टुकड़े बाज़ार।

उन्होंने कहा, “AI जो प्रस्तुत करता है वह कोई नई रोग‑निदान नहीं है; यह अंततः एक ऐसा उपचार है जिसे पूरे देश में बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी नोट किया कि वैश्विक दक्षिण के लगभग 60 करोड़ किसानों के लिए भी यदि उत्पादकता में केवल 10% की वृद्धि हो जाए, तो यह उनके अनुसार इस सदी का सबसे बड़ा गरीबी‑निवारण अवसर होगा।

कृषि को एक पुराने, परंपरागत क्षेत्र के बजाय एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस AI‑प्रयास को 10,372 करोड़ रुपये के इंडिया AI मिशन से जोड़ा, जो स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग क्षमता, डेटासेट और स्टार्टअप ढांचे का बड़े पैमाने पर निर्माण कर रहा है।

उन्होंने भारतजन (BharatGen) – भारत के सरकार‑स्वामित्व वाले बड़े भाषा‑मॉडल पारिस्थितिकी‑तंत्र – की चर्चा की, जिसने पहले ही “Agri Param” नामक एक क्षेत्र‑विशिष्ट कृषि मॉडल जारी किया है जो 22 भारतीय भाषाओं में काम करता है और किसानों को अपनी मातृभाषा में सलाह‑सहायता तक पहुंच देता है। उन्होंने कहा की यह वह AI है जो किसान से मराठी, भोजपुरी या कन्नड़ में बात करता है। और भाषाई समावेशन के महत्व पर ज़ोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) इंडिया AI ओपन स्टैक को समर्थन दे रहा है, जो एक खुला, अंतरसंचालित (interoperable) ढांचा है, ताकि देश के किसी भी हिस्से में विकसित किए गए Agri‑AI समाधान राष्ट्रीय फ्रेमवर्क में आसानी से जुड़ सकें।

अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (Anusandhan NRF) IITs, IISc और ICAR के साथ मिलकर डीप‑टेक और AI अनुसंधान को वित्त पोषित कर रहा है, जिसमें कृषि अनुप्रयोग भी शामिल हैं। डॉ. सिंह ने ड्रोन और उपग्रह‑आधारित मैपिंग की ओर इशारा किया, जो पहले से ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड और स्वामित्व मिशन को मजबूत कर रही हैं, क्योंकि वे भूमि और मिट्टी के सत्यापित डेटा प्रदान करती हैं। उन्होंने जलवायु बुद्धिमत्ता (climate intelligence) में निवेश की बात की, जहां पृथ्वी विज्ञान और AI को प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में एकीकृत किया जा रहा है, ताकि किसान “घबराएं नहीं, बल्कि योजना बनाएं।”

उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी (biotechnology) की भूमिका टिकाऊ और रोग‑प्रतिरोधी फसलों के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, जिसमें कीट और पौधों के रोगों का शुरुआती, लक्षण‑रहित पता लगाना भी शामिल है, साथ ही एक चक्रीय फसल अर्थव्यवस्था (circular crop economy) को आगे बढ़ाने में भी यह महत्वपूर्ण योगदान देगी।

वहीं, संभावनाओ के पैमाने पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के लगभग 14 करोड़ खेती इकाइयां, जिनमें अधिकांश छोटे और सीमांत किसान हैं, एक साथ वार्षिक लगभग 70,000 करोड़ रुपये का मूल्य उत्पन्न कर सकती हैं, अगर AI‑संचालित सलाह प्रत्येक किसान को बेहतर निवेश‑समय, कीट‑भविष्यवाणी और बाज़ार‑संबंधन के माध्यम से प्रति वर्ष केवल 5,000 रुपये भी बचा दे। उन्होंने महाराष्ट्र की 500 करोड़ रुपये की MahaAgri‑AI नीति 2025–29 को एक आदर्श मॉडल के रूप में उद्धृत किया और कहा कि केंद्र ऐसी राज्य‑स्तरीय पहलों को समन्वित और बढ़ावा देगा।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026–27 में ‘Bharat‑VISTAAR’ नामक एक बहुभाषी AI उपकरण का प्रस्ताव रखा गया है, जो AgriStack पोर्टल और ICAR के कृषि‑प्रथा पैकेज को AI प्रणालियों के साथ एकीकृत करके अनुकूलित सलाह‑सहायता प्रदान करेगा और खेती‑जोखिम को कम करेगा।

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