केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने गुरुवार को महानदी जल विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ बैठक की। बैठक में जलशक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। इस दौरान बातचीत, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के माध्यम से विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी।
तकनीकी सहयोग से समाधान की दिशा में बढ़े कदम
बैठक में महानदी जल विवाद के समाधान के लिए जारी प्रयासों की समीक्षा की गई। केंद्र सरकार ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत और सहयोग को बढ़ावा देकर एक निष्पक्ष एवं स्थायी समाधान निकालने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है।
2018 में गठित हुआ था महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण
महानदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। ओडिशा सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956’ के तहत महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (एमडब्ल्यूडीटी) का गठन किया था। सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर देने के लिए न्यायाधिकरण का कार्यकाल भी बढ़ाया गया।
संयुक्त तकनीकी समिति की प्रगति की समीक्षा
बैठक में संयुक्त तकनीकी समिति के कार्यों की भी समीक्षा की गई। समिति ने अब तक कई बैठकें आयोजित कर विभिन्न तकनीकी मुद्दों पर आम सहमति बनाई है। केंद्रीय जल आयोग के चेयरमैन की अध्यक्षता में गठित विस्तारित तकनीकी समिति की पहली बैठक 29 जुलाई 2026 को आयोजित हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर लंबित तकनीकी विषयों पर चर्चा की।
महानदी दोनों राज्यों के लिए जीवन रेखा : सी. आर. पाटिल
बैठक में केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि महानदी दोनों राज्यों के लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि आपसी संवाद, तकनीकी सहयोग और भरोसे के आधार पर ही ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जो निष्पक्ष, टिकाऊ और सभी पक्षों को स्वीकार्य हो।
अन्य जल विवादों के समाधान का भी किया उल्लेख
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में यमुना जल परियोजना समझौता, नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णयों के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों का समाधान और संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (एमपीकेसी) लिंक परियोजना पर बनी सहमति इस बात का उदाहरण हैं कि निरंतर संवाद और सहकारी संघवाद के जरिए जटिल जल विवादों का भी समाधान संभव है।
दोनों राज्यों ने दोहराया सहयोग का संकल्प
बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों ने रचनात्मक माहौल में तकनीकी बातचीत को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने जलशक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग की ओर से दिए जा रहे सहयोग की भी सराहना की।
दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधान पर जोर
बैठक के समापन पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने कहा कि उद्देश्य केवल वर्तमान विवाद का समाधान करना नहीं, बल्कि महानदी बेसिन के प्रबंधन के लिए एक दीर्घकालिक, निष्पक्ष और टिकाऊ व्यवस्था तैयार करना भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों राज्यों के बीच लगातार संवाद और सहयोग से आपसी सहमति वाला स्थायी समाधान निकलेगा। (इनपुट: पीआईबी)


