गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र का बड़ा कदम, एक सप्ताह में बनेगी उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी

गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी की मौजूदगी में कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में तय किया गया कि एक सप्ताह के भीतर विशेष संयुक्त कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी गन्ने की रिकवरी, नाप-तौल, वेस्टेज, प्रयोगशाला जांच और भुगतान से जुड़े विवादों की जांच कर पारदर्शी और स्थायी समाधान के लिए सिफारिशें देगी।

किसान और वैज्ञानिक भी होंगे कमेटी का हिस्सा

प्रस्तावित कमेटी में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ किसान संगठनों के अधिकृत प्रतिनिधि, शुगर मिलों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। कमेटी गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी के वैज्ञानिक मापदंड, आधुनिक लैब टेस्टिंग व्यवस्था और वजन की शुद्धता से जुड़े तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच करेगी।

रिकवरी में अंतर और वजन में कटौती पर सरकार का सख्त रुख

बैठक में किसानों ने शुगर मिलों द्वारा रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन में कटौती, वेस्टेज और वास्तविक रिकवरी को लेकर अपनी समस्याएं रखीं। शिवराज सिंह चौहान ने इन शिकायतों को गंभीर और संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि किसानों के साथ किसी भी तरह का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्या का आधा-अधूरा या तात्कालिक समाधान निकालने के बजाय ऐसी पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे भविष्य में किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान पर बनेगी रणनीति

बैठक में समस्याओं के समाधान को दो चरणों में आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। पहले चरण में अल्पकालिक यानी तत्काल प्रशासनिक सुधारों पर काम होगा, जबकि दूसरे चरण में दीर्घकालिक नीतिगत और तकनीकी व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत किया जाएगा। संयुक्त कमेटी तय समय-सीमा के भीतर अपनी व्यावहारिक सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।

‘किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा’

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की बात गंभीरता से सुनते हुए कहा कि मोदी सरकार के लिए किसानों की सेवा भगवान की पूजा के समान है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार उनकी समस्याओं, सुझावों और शिकायतों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करेगी। उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी उपज के पारदर्शी मूल्यांकन के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी।

राज्यों से सहयोग की भी अपेक्षा

केंद्र सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया में कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा की है, ताकि किसानों से जुड़े मामलों पर तेजी से कार्रवाई की जा सके। बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कर्नाटक सरकार के संबंधित मंत्री भी मौजूद रहे। अधिकारियों को किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित तरीके से काम करने पर जोर दिया गया।

FRP और लागत आकलन में पारदर्शिता पर जोर

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी FRP के निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत आकलन के तौर-तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार राज्यों और किसानों के समन्वय से गन्ने के मूल्य निर्धारण और संबंधित प्रक्रियाओं में हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

किसानों की आय सुरक्षा को प्राथमिकता

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि किसानों की उपज का पारदर्शी मूल्यांकन, उचित भुगतान और आय सुरक्षा उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। गन्ना रिकवरी में कथित विसंगतियों, नाप-तौल और अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए बनने वाली उच्चस्तरीय कमेटी को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। (इनपुट: पीआईबी)