उत्तराखंड के चमोली जिले में मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा और पानी भरने की घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से रातभर राहत व बचाव अभियान लगातार जारी रहा। जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहकर रेस्क्यू अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार देर रात्रि चमोली स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा एवं पानी भरने की घटना की सूचना प्राप्त होते ही तत्काल राज्य आपदा परिचालन केंद्र देहरादून पहुंचे। मुख्यमंत्री ने वहां से पूरे राहत एवं बचाव अभियान की कमान संभालते हुए अधिकारियों को युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री धामी ने रेस्क्यू किए गए मजदूरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे संवाद कर उनका हालचाल जाना और उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है तथा उनके उपचार और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने आपदा परिचालन केंद्र से चमोली जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा और पल-पल की स्थिति की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि टनल में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टीआरटी टनल की लंबाई लगभग 3 किलोमीटर है। टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा और पानी आने की स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके चलते टनल में कार्यरत कुछ लोग अंदर फंस गए। टनल में कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी, जिनमें से रातभर चले राहत व बचाव अभियान में अब तक 19 लोगों को बाहर निकाल लिया गया। वहीं, शेष 3 लोगों की तलाश और रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। घटना के बाद राहत व बचाव कार्यों में सहयोग के लिए टनल के अंदर गए 6 बचावकर्मी भी सुरक्षित हैं। घटना में अभी तक 7 लोगों की मृत्यु की सूचना है।
रेस्क्यू किए गए घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग की टीमों की ओर से घायलों के उपचार व स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।
गोपेश्वर के जिला अस्पताल के डॉक्टर आयुष ने कहा, “अब तक टीएचडीसी से कुल 19 लोगों को हमारे पास लाया गया था। इनमें से 7 लोगों को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि 13 लोग अभी भर्ती हैं और उनकी हालत काफी हद तक स्थिर है।”
राहत व बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस सहित अन्य तकनीकी और विशेषज्ञ टीमें मौके पर मौजूद हैं। टनल के भीतर मलबा और पानी की चुनौती के बीच बचाव दल अत्यंत सावधानी व समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
एनडीआरएफ के टीम कमांडर अमृत लाल मीणा ने कहा, “हमारी टीम गौचर से आई। जैसे ही हमें जानकारी मिली, हमने 5 मिनट के अंदर अपनी टीम को रवाना कर दिया। हमें शाम 7.15 बजे जानकारी मिली, हम रात 8.45 बजे यहां पहुंचे और 8.55 बजे ऑपरेशन शुरू किया। हमारी क्विक रिस्पॉन्स टीम में 6 बचावकर्मी शामिल थे। वे सबसे पहले सुरंग के अंदर गए। पानी का स्तर छाती से ऊपर था।”
उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के दौरान टीम सुरंग से होते हुए घटना वाली जगह तक पहुंची। वहां लोग पानी के अंदर फंसे हुए थे। उन्होंने बताया कि हमारी टीम ने चार लोगों के शवों का रेस्क्यू किया।
वहीं, जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मौके पर अधिकारियों और रेस्क्यू टीमों से लगातार जानकारी लेते हुए शेष लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों और तकनीकी सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्यों के साथ ही घायलों के उपचार व अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी लगातार जुटाई जा रही हैं। (इनपुट-आईएएनएस)


