भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शोध इकाई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की बदलती वित्तीय जरूरतों और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) संबंधी दिशा-निर्देशों की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए। रिपोर्ट में आधारभूत ढांचे, जलवायु वित्त, नवीकरणीय ऊर्जा और विभिन्न क्षेत्रों में ऋण सीमा बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय समावेशन और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण व्यवस्था की भविष्य की जरूरतों का आकलन कर नीतिगत बदलाव करने का यह उपयुक्त समय है, ताकि समाज के कमजोर वर्गों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1972 में शुरू की गई प्राथमिकता क्षेत्र ऋण व्यवस्था ने वंचित क्षेत्रों तक ऋण पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन अब इसे समय की नई आवश्यकताओं के अनुरूप बदले जाने की जरूरत है। इसमें पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन (ईएसजी) आधारित वित्तपोषण, सतत विकास, आधारभूत ढांचा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को भी प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।
एसबीआई रिसर्च ने कई क्षेत्रों में ऋण सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ऋण सीमा 35 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये, शिक्षा ऋण की सीमा 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने, आवास ऋण और सामाजिक आधारभूत ढांचे से जुड़े ऋण की सीमा बढ़ाने तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण की सीमा में भी वृद्धि की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि आधारभूत ढांचा परियोजनाओं, जलवायु अनुकूल वित्तपोषण, हरित एवं ईएसजी बांडों में निवेश तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत दिए जाने वाले ऋण को भी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के दायरे में शामिल किया जाए। इससे देश की विकास संबंधी बदलती जरूरतों के अनुरूप वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आधारभूत ढांचे में बड़े पैमाने पर दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता होगी। इसलिए आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को प्राथमिकता क्षेत्र का दर्जा देने या ऐसे ऋणों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की गणना से अलग रखने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, ग्रामीण आधारभूत ढांचा विकास निधि (आरआईडीएफ) में भी सुधार की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में बैंक आरआईडीएफ में निवेश करने की तुलना में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण प्रमाणपत्र (पीएसएलसी) खरीदना अधिक लाभकारी मानते हैं। इसलिए इस व्यवस्था में संतुलन बनाने की जरूरत है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि उभरते क्षेत्रों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में शामिल करने और मौजूदा नियमों में सुधार से देश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक ऋण प्रवाह बढ़ेगा तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
(इनपुट-आईएएनएस)


