प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026’ के उद्घाटन समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस दशक के अंत तक भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश अवसर बनने का अनुमान है। पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आया है, जबकि वर्ष 2024 में आयोजित री-इन्वेस्ट समिट के बाद से अब तक करीब 6 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है और इसका भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में निहित है। पश्चिम एशिया संकट सहित वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। पिछले एक दशक में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए निवेश और विकसित की गई व्यवस्थाओं ने देश को वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रभावों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में अपनी क्षमता और प्रतिबद्धता साबित की है।
ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कई अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया है। मौजूदा संकट ने दुनिया के सभी देशों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध आर्थिक सुरक्षा से है। जीवाश्म ईंधन के भंडार सीमित हैं और उनका वितरण कुछ क्षेत्रों तक सीमित है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता असीमित है और हर देश इसका लाभ उठा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि दुनिया जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भर रहती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था बार-बार बाधित होती रहेगी। ऐसे में स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना भविष्य की जरूरत है।
500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में संकल्प, जुनून और प्रदर्शन के आधार पर उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2021 में कॉप-26 के दौरान भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का संकल्प लिया था। भारत इस लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और करीब 300 गीगावॉट क्षमता हासिल कर चुका है।
पीएम मोदी ने बताया कि पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2030 तक स्थापित बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे भारत ने 2025 में ही पूरा कर लिया। आज देश की 50% से अधिक स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों पर आधारित है। भारत आने वाले 10 से 11 वर्षों में 500 गीगावॉट नई गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत आज दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश अपनी क्षमता और सामर्थ्य के दम पर निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करेगा।
पीएम सूर्यघर योजना से 65 लाख से अधिक परिवार जुड़े
प्रधानमंत्री ने कहा कि फरवरी 2024 में शुरू की गई पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। पिछले 24 से 25 महीनों में 65 लाख से अधिक घर इस अभियान से जुड़ चुके हैं। हर छह दिन में करीब एक लाख नए घर सौर ऊर्जा आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं।
पीएम मोदी ने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार, इन घरों के बिजली बिल में करीब 76% तक की कमी आई है। कई परिवारों के बिजली बिल शून्य हो गए हैं। कुछ परिवार अपनी जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का प्रभावी मॉडल बन सकती है।
किसानों और सरकारी इमारतों को सौर ऊर्जा से जोड़ने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत उद्योगों, खेतों और सरकारी इमारतों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ रहा है। देश में 44 हजार से अधिक सरकारी इमारतें सौर ऊर्जा से जुड़ चुकी हैं, जिससे हर साल करीब 700 करोड़ रुपए की बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत 30 लाख से अधिक किसानों के लिए सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की व्यवस्था की गई है। अनुमान है कि सोलर पंप का लाभ लेने वाले प्रत्येक किसान को हर साल करीब एक लाख रुपए की बचत हो रही है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने पीएम सूर्य सरोवर योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसके तहत जलाशयों, तालाबों और झीलों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा की जा रही है। इससे जल निकायों का बेहतर उपयोग हो रहा है और जमीन की जरूरत भी कम हो रही है।
ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में बड़ी छलांग की तैयारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम केवल हाइड्रो, सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं है। देश ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी मिशन मोड में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि परिवहन क्षेत्र को भी ग्रीन हाइड्रोजन से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ महीने पहले ही भारत ने अपनी पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन शुरू की है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से बिजली वितरण को मिलेगी मजबूती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि केवल बिजली का उत्पादन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका कुशल वितरण और जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाना भी जरूरी है। देश के कुछ हिस्सों में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन अधिक होता है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में इसकी उपलब्धता कम है। इस अंतर को दूर करने के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।
इन कॉरिडोर के तहत विशेष ट्रांसमिशन लाइनों और सब-स्टेशनों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि उत्पादन वाले क्षेत्रों से बिजली मांग वाले क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा कि ‘वन नेशन, वन पावर ग्रिड’ ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले वर्षों में पांच क्षेत्रीय ग्रिड को एकीकृत नेटवर्क से जोड़ा गया है और अब पूरा देश एक ही आवृत्ति वाले पावर ग्रिड से जुड़ा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को मजबूत बनाने के अगले चरण के लिए करीब दो लाख करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है।
सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि
पीएम मोदी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की सफलता के पीछे घरेलू विनिर्माण क्षमता का विस्तार भी एक बड़ी वजह है। एक दशक पहले देश की सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता करीब दो गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर 200 गीगावॉट से अधिक हो गई है। सोलर सेल की विनिर्माण क्षमता भी करीब 40 गीगावॉट तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि भारत अब सौर ऊर्जा से जुड़े अन्य उपकरणों और घटकों के विनिर्माण का भी विस्तार कर रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की सफलता का प्रमाण है।
हर सरकारी भवन और स्कूल को सौर ऊर्जा से जोड़ने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अभी लंबा रास्ता तय करना है। हर सरकारी इमारत, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है। उन्होंने राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया, ताकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिले और एक स्थान की सफलता से दूसरे क्षेत्र सीख सकें।
किसानों को अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता बनाने का विजन
पीएम नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को और विस्तार देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लाखों सोलर पंप वितरित किए जा चुके हैं, लेकिन अब सोलर पंप से आगे बढ़ने की जरूरत है। उनका विजन है कि किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनें। उन्होंने सुझाव दिया कि किसान अपनी खाली जमीन पर सोलर पैनल लगाएं और खेतों की मेड़ों का भी सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग करें। इस व्यवस्था को अधिक से अधिक गांवों तक पहुंचाने की जरूरत है।
स्टार्टअप और युवाओं से नवाचार पर ध्यान देने की अपील
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप, आईआईटी, नवाचारकर्ताओं और उद्यमियों से ऐसे मॉडल विकसित करने का आग्रह किया, जिनसे परिवारों की अधिकतम ऊर्जा जरूरतें सौर बिजली से पूरी हो सकें। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें सौर ऊर्जा हर मौसम में और 24 घंटे उपलब्ध हो।
पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ कुकिंग को बढ़ावा देने और आयातित गैस पर निर्भरता कम करने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति बननी चाहिए, जहां परिवार अपनी छत पर लगे सोलर प्लांट से बनी बिजली से खाना पका सकें और अपने इलेक्ट्रिक दोपहिया तथा चारपहिया वाहनों को घर पर ही चार्ज कर सकें। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों को हर साल हजारों रुपए की बचत हो सकती है। उन्होंने डेयरी क्षेत्र, पशुओं के चारे, फसल कटाई और कटाई के बाद की प्रक्रियाओं के लिए भी सौर ऊर्जा आधारित उपकरण विकसित करने पर जोर दिया।
बैटरी स्टोरेज और स्वदेशी तकनीक में निवेश के अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगली पीढ़ी के नवाचार के लिए देश को जरूरी हार्डवेयर और स्वदेशी ऊर्जा भंडारण समाधान विकसित करने होंगे। बैटरी स्टोरेज की नई क्षमता तैयार करना समय की मांग है। उन्होंने शोधकर्ताओं और निवेशकों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत में विकसित किए गए समाधान दुनिया के अनेक देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
ग्रीन जॉब के क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है। सोलर पैनल और अन्य उपकरणों के विनिर्माण से लेकर उनकी स्थापना, सर्विसिंग और परिवहन तक विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ ग्रीन जॉब के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। जब रसोई से लेकर परिवहन तक की व्यवस्थाएं स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित होंगी, तब एक नए उद्योग और रोजगार के व्यापक अवसरों का निर्माण होगा।
निवेशकों के लिए भारत में बड़े अवसर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में ऊर्जा की मांग, बाजार का आकार और विकास की संभावनाएं निवेशकों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रही हैं। देश में राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता भी निवेश को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक यानी करीब 164 अरब डॉलर का निवेश आया है। वर्ष 2024 की री-इन्वेस्ट समिट से लेकर अब तक के दो वर्षों में करीब छह लाख करोड़ रुपए यानी 63 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ है। अनुमान है कि इस दशक के अंत तक इस क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक यानी करीब 220 अरब डॉलर के निवेश अवसर बनेंगे।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के जरिए दुनिया तक पहुंचेगी स्वच्छ ऊर्जा
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना के साथ अपनी स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के पीछे भी यही सोच है। भारत का प्रयास है कि नवीकरणीय ऊर्जा के लिए जरूरी वित्तपोषण, तकनीक और विशेषज्ञता हर जरूरतमंद देश तक पहुंचे।
पीएम नरेंद्र मोदी ने अफ्रीका के लिए 20 करोड़ डॉलर की अफ्रीका सोलर फैसिलिटी का प्रस्ताव रखे जाने का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाला दशक जलवायु लक्ष्यों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सभी देशों और क्षेत्रों को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का भागीदार बनाकर ही स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। (इनपुट: पीआईबी)


