केरल में जंगली हाथियों की लगातार मौतों से चिंता, पर्यावरण संगठनों ने की सीबीआई जांच की मांग

केरल में जंगली हाथियों की लगातार हो रही मौतों और उनकी घटती संख्या को लेकर पर्यावरण संगठनों ने चिंता जताई है। संगठनों ने राज्य में हाथियों की मौत के मामलों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने केरल हाईकोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल गठित कर मामले की पड़ताल कराने का भी आग्रह किया है। यह मांग पर्यावरण संगठनों और कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय बैठक ‘वन स्पंदनम’ के दौरान उठाई गई। राज्य के वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2005 में केरल में जंगली हाथियों की अनुमानित संख्या 5,135 थी, जो 2023 में घटकर 2,386 और 2024 में 1,793 रह गई। हालांकि, वन विभाग का कहना है कि हाथियों की संख्या में उतार-चढ़ाव के पीछे केरल और पड़ोसी राज्यों के बीच हाथियों की आवाजाही भी एक कारण हो सकती है।

छह वर्षों में 744 हाथियों की मौत

सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति के अनुसार, अप्रैल 2019 से मार्च 2025 के बीच केरल में 744 जंगली हाथियों की मौत दर्ज की गई। इस अवधि में प्रतिवर्ष औसतन लगभग 124 हाथियों की मौत हुई। समिति ने हाथियों की वार्षिक मृत्यु दर 4.45 से 6.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया। एक हालिया रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 से 2026 के बीच हाथियों की 1,260 मौतें दर्ज की गईं। इन आंकड़ों में प्राकृतिक कारणों और मानवीय गतिविधियों के कारण हुई मौतें, दोनों शामिल हैं।

पांच जिलों में दर्ज हुईं 72.5 प्रतिशत मौतें

हाथियों की मौत से जुड़े रिकॉर्ड की भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से की गई मैपिंग में कुछ जिलों में मौतों के अधिक मामले सामने आए हैं। मैप किए गए 1,196 रिकॉर्ड में से सबसे अधिक 226 इडुक्की जिले में दर्ज किए गए। इसके बाद एर्नाकुलम में 203, पलक्कड़ में 152, वायनाड में 146 और मलप्पुरम में 140 रिकॉर्ड मिले। इन पांच जिलों में कुल 867 रिकॉर्ड दर्ज किए गए, जो मैप किए गए कुल मामलों का लगभग 72.5 प्रतिशत है। वहीं, इडुक्की, एर्नाकुलम और पलक्कड़ में अकेले 581 रिकॉर्ड मिले, जो कुल का लगभग आधा है।

अवैध शिकार की आशंका, हाथी कॉरिडोर सुरक्षित करने की मांग

पर्यावरण संगठनों ने हाथियों के दांत मिलने से अवैध शिकार की आशंका को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि हाथियों की लगातार हो रही मौतों से राज्य में इस वन्यजीव की दीर्घकालिक सुरक्षा और अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है। संगठनों और हाथी संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मौतों के कारणों तथा उनसे जुड़ी परिस्थितियों की विस्तृत और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित करने और हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों में मौजूद बाधाओं को हटाने पर जोर दिया। बैठक में इडुक्की के जिला कलेक्टर डॉ. दिनेशान चेरुवट्ट की ओर से ऐसी बाधाओं को दूर करने के लिए की गई पहल की सराहना की गई और उनके प्रयासों के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया। बैठक में जिला कलेक्टर को कथित तौर पर धमकी देने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग भी उठाई गई। वायनाड नेचर कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष एन. बदुशा ने बैठक की अध्यक्षता की। (इनपुट- आईएएनएस)