प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इजरायल की संसद में अपने संबोधन कहा कि भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द झेला है और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजराइल के साथ खड़ा है।
हमास हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं भारत के लोगों की ओर से 7 अक्टूबर को हुए हमास के बर्बर आतंकी हमले में जान गंवाने वालों और प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना लेकर आया हूं। हम आपका दर्द समझते हैं, आपके दुख में शामिल हैं। भारत इस कठिन समय में और आगे भी पूरे विश्वास के साथ आपके साथ खड़ा है।”
नेसेट में ऐतिहासिक संबोधन
उन्होंने यह बातें इजराइल की संसद नेसेट (Knesset) में अपने संबोधन के दौरान कहीं। किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला संबोधन था। उनके भाषण के दौरान सांसदों ने कई बार तालियां बजाकर सराहना की।
गाजा शांति पहल को भारत का समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल समाधान का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा, “उम्मीद को बनाए रखना जरूरी है। यह पहल क्षेत्र के सभी लोगों के लिए, फिलिस्तीन मुद्दे सहित, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का रास्ता प्रशस्त कर सकती है। भारत ने इस पहल का स्पष्ट समर्थन किया है।”
इजराइल से विशेष जुड़ाव का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने कहा कि वे फिर से इजराइल आकर बेहद प्रसन्न हैं और उन्हें इस भूमि से विशेष लगाव रहा है। उन्होंने कहा कि वे 1.4 अरब भारतीयों की शुभकामनाएं, मित्रता, सम्मान और साझेदारी का संदेश लेकर आए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था, उसी दिन भारत ने औपचारिक रूप से इजराइल को मान्यता दी थी।
होलोकॉस्ट और ऐतिहासिक मानवीय उदाहरण
प्रधानमंत्री मोदी ने होलोकॉस्ट को मानव इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि गुजरात के नवानगर के महाराजा, जिन्हें जाम साहब के नाम से भी जाना जाता है, ने कठिन समय में पोलैंड के बच्चों को शरण दी थी, जिनमें यहूदी बच्चे भी शामिल थे।
भारत में यहूदी समुदाय का सम्मान
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में यहूदी समुदाय बिना किसी उत्पीड़न या भेदभाव के डर के साथ रहता आया है और समाज में पूरी भागीदारी करता है। उन्होंने इसे भारत के लिए गर्व की बात बताया।
जोरदार स्वागत और ऐतिहासिक क्षण
इससे पहले संसद में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। सदन “मोदी, मोदी” के नारों से गूंज उठा। स्पीकर अमीर ओहाना ने हिंदी में उनका स्वागत करते हुए यरुशलम में उनके आगमन को ऐतिहासिक बताया। (इनपुट: आईएएनएस)


