रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को संविधान दिवस (Samvidhan Divas) पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह दिन उन महान दूरदर्शी नेताओं को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने भारत के गणराज्य की बुनियाद रखी और राष्ट्र की यात्रा को मार्गदर्शन देने वाले मूल्यों का संकल्प हमें सौंपा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर संदेश साझा करते हुए उन्होंने लिखा:
“संविधान दिवस पर हर भारतीय को हार्दिक शुभकामनाएँ। यह दिन हमें उन महान व्यक्तित्वों की याद दिलाता है जिन्होंने हमारे गणराज्य की आधारशिला रखी। आइए न्याय और समानता के प्रति अपने संकल्प को दोहराएँ और बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा कल्पित भविष्य के निर्माण में योगदान दें।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ‘X’ पर शुभकामनाएँ देते हुए कहा:
“संविधान दिवस पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई। न्याय, समानता और बंधुत्व भारतीय संविधान की मूल आत्मा है।”
उन्होंने कहा कि भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की अद्भुत दूरदृष्टि, प्रखर बुद्धि और अथक परिश्रम से रचित संविधान विश्व की सबसे सशक्त लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है।
योगी ने आगे कहा कि संविधान न केवल राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति का आधार है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्रदान करता है।
संविधान दिवस क्यों मनाया जाता है?
संविधान दिवस (Samvidhan Divas) हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है।
इसी दिन 1949 में भारतीय संविधान को संविधान सभा ने औपचारिक रूप से अपनाया था, जिसने भारत को एक संप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य बनने की दिशा में निर्णायक मोड़ दिया।
2015 में, केंद्र सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में 26 नवंबर को आधिकारिक रूप से संविधान दिवस घोषित किया। इससे पहले यह दिन कानून दिवस (Law Day) के रूप में मनाया जाता था।
संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिसे पूर्ण स्वराज प्रस्ताव (1930) की याद में चुना गया — यही कारण है कि 26 जनवरी को देश गणतंत्र दिवस भी मनाता है।
संविधान दिवस का उद्देश्य देश में संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देना और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना है।
-(इनपुटःएजेंसी)


