सहकारिता क्षेत्र को चाहिए 17 लाख प्रशिक्षित युवा, त्रिभुवन विश्वविद्यालय निभाएगा अहम भूमिका: मुरलीधर मोहोल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन के तहत स्थापित त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह का आयोजन गुजरात के आणंद में हुआ। केंद्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए 302 विद्यार्थियों को स्नातक और दो विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय भविष्य के सहकारी नेतृत्वकर्ताओं, शोधकर्ताओं और पेशेवर प्रबंधकों को तैयार करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

दीक्षांत नए संकल्प और नई यात्रा की शुरुआत

मुरलीधर मोहोल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए संकल्प और वास्तविक कार्यक्षेत्र में नई यात्रा का आरंभ है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

सहकारिता को आधुनिक तकनीक और नवाचार से मिलेगा नया आयाम

राज्य मंत्री ने कहा कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित, कुशल और प्रतिबद्ध मानव संसाधन तैयार करना है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आधुनिक प्रबंधन, तकनीक और नवाचार के जरिए सहकारी आंदोलन को नई ऊंचाई देगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नवाचार का उपयोग कर सहकारी संस्थाओं तथा कृषि व्यवसायों को अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की अपील की।

आणंद की विरासत से जुड़ा विश्वविद्यालय

मोहोल ने कहा कि आणंद भारत की श्वेत क्रांति की जन्मभूमि है, जहां त्रिभुवनदास पटेल और डॉ. वर्गीज कुरियन के प्रयासों से अमूल आंदोलन ने देश को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाया। उन्होंने कहा कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय इरमा की लगभग 45 वर्षों की अकादमिक विरासत पर आधारित है, जिसे 2025 में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देकर विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया।

देश की आधी आबादी किसी न किसी रूप में सहकारिता से जुड़ी

उन्होंने कहा कि देश में 8.5 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं, जिनसे 32 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। सहकारिता डेयरी, बैंकिंग, कृषि, मत्स्य पालन सहित कई क्षेत्रों में किसानों, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को सशक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि जुलाई 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद मंत्रालय ने 140 से अधिक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर क्षेत्र के विस्तार और आधुनिकीकरण को नई गति दी है।

पैक्स, राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं और नई योजनाओं पर जोर

मोहोल ने कहा कि बहुद्देशीय पैक्स, विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना, NCEL, NCOL, BBSSL और NCDC जैसी पहलों के माध्यम से किसानों को ‘बीज से बाजार तक’ की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों में दो लाख बहुद्देशीय पैक्स बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें 35 हजार से अधिक समितियां काम शुरू कर चुकी हैं।

सहकारिता का विस्तार नए क्षेत्रों तक

राज्य मंत्री ने कहा कि सहकारिता अब केवल डेयरी, चीनी, उर्वरक और बैंकिंग तक सीमित नहीं है। जैविक खेती, बीज उत्पादन, पर्यटन, भंडारण, बीमा, खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल सेवाएं और इथेनॉल, बायोगैस तथा जैविक खाद जैसे क्षेत्रों में भी सहकारी मॉडल का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने भारत टैक्सी को ‘ड्राइवर ही मालिक’ की अवधारणा पर आधारित सहकारी मॉडल का नया उदाहरण बताया।

17 लाख प्रशिक्षित युवाओं की होगी जरूरत

मुरलीधर मोहोल ने कहा कि आने वाले समय में सहकारिता क्षेत्र को 17 लाख से अधिक प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय इस मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और पेशेवर नेतृत्व, अनुसंधान क्षमता तथा आधुनिक प्रबंधन कौशल से युक्त मानव संसाधन तैयार करेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में ‘सहकार से समृद्धि’ की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

गांधीनगर में तैयारियों की समीक्षा

अपने गुजरात दौरे के दौरान मुरलीधर मोहोल ने गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (NICM) में समीक्षा बैठक भी की। उन्होंने त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों की तैयारियों की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं संस्थागत व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। (इनपुट: पीआईबी)